Bhar Do Jholi Meri Ya Mohammed
Shamim
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Lyrics
भर दो झोली, भर दो झोली मेरी, या मोहम्मद
भर दो झोली मेरी या मोहम्मद, लौट कर मैं न जाऊंगा खाली
भर दो झोली मेरी, या मोहम्मद
लौट कर मैं न जाऊगा खाली
भर दो झोली मेरी, या मोहम्मद
लौट कर मैं न जाऊगा खाली, हो
लौट कर मैं न जाउंगा खाली
भर दो झोली मेरी, या mohammad,लौट कर मैं न जाउंगा खाली
कुछ नवासों का सदक़ा था हो, कुछ नवासों का सदक़ा था हो
दर पे आया हूँ बनकर सवाली
कुछ नवासों का सदक़ा था हो, दर पे आया हूँ बनकर सवाली
तुम्हारे आस्थाने से ज़माना क्या नहीं पाता
तुम्हारे आस्थाने से जमाना क्या नहीं पाता
कोई भी दर से खाली मानने वाला नहीं जाता
भर दो झोली
हम सब की, भर दो झोली
हम सब की, भर दो झोली मेरी या मोहम्म्दी, लौट कर मै ना जाउंगा खाली
लौट कर मै ना जाउंगा खाली
तुम ज़माने के मुख्तार हो या नबी, बेकसों के मददगार हो या नबी
सबकी सुनते हो, अपने हों या गैर हो
सबकी सुनते हो अपने हों या गैर हो
तुम गरीबों के गमकार हो या नबी
भर दो झोली
हम सब की, भर दो झोली
हम सब की, भर दो झोली मेरी या मोहम्मद
लौट कर मैं ना जाऊंगा खाली
लौट कर मैं ना जाऊंगा खाली
हां मेहरंज और मुसीबत के मारे हुए
सख़्त मुश्किल में हैं, ग़म से हारे
हुए।या नबी कुछ ख़ुदा रह हमें भीख दो
या नबी кुछ खुदा रह हमें भीख दो
दर पर आए हैं झोली पसारे हुए
भर दो झोली, यह मुhammad, भर दो झोली, यह
मुhammad, भर दो झोली मेरी या मोहम्मदी
लौट कर मै नa जाऊगा ख़ाली, लौट कर मै ना जाऊँगा खाली
है मुहालिफ जामिन आ किधर जाय हम
हालत ए बेकसी किसको दिखलाय हम
हम तुम्हारे भिकारी है या मुफ्ति फा
हम तुम्हारे भिकारी है या मुफ्ति फा
किस्के आगे भला हाथ पहलाय हम
भर दो झोली, मेरे आका, भर दो झोली, मेरे आका, भर दो झोली मेरी या
मुहम्मदी, लौट कर मैं न जाउंगा खालि, लौट कर मैं ना जाउंगा खाली
जिंदागी बख्श दी बंदगी को, आबरू दीन ए हक़ की बजाली
आबरू दीन ए हक़ की बजाली
जो इब्ने मुर्तजा ने किया काम खूब है, Qुर्बान ये हुसैन का अंजाम खूब है
।Qurban हो गई फाटिमा zehra के चैन ने, दीनए खुदा की शान बढाई हुसैन ने
बख़्शी है जिसने मजहाबे इस्लाम को हयात, बख़्शी है जिसने मजहा
बे इस्लाम को हयात, कितनी अजीम हज़रत शब्बीर की है ज़ात, कि
तनी अजीम हज़रत शब्बीर की है ज़ात, मैदान-ए-कربला में शाहे खु
शखिसाल ने, मैदान-ए-क्रबला में शाहे खुशखिसाल ने, सजदे में
सर कटा के मोहम्म्द के लाल ने,नबी साहिब मोहम्मद के लाल ने
जिंदगी बख्श दी बंदगी को
आबरू दी ने हक़ की बजा ली
वो मोहम्मद का प्यारा नवासा
वो मोहम्मद का प्यारa नवासा
जिसने सजदे में गर्दन कटा ली
वो मोहम्मद का प्यारा नवासा
जिसने सजदे में गर्दन कटा ली
जिसने सजदे में गर्दन कटा ली
हश्र में उनको देखेंगे जिस दम
उम्मती ये कहेंगे खुशी से, हो
उम्मती ये कहेंगे खुशी से
हश्र में उनको देखेंगे जिस दम
उम्मती ये कहेंगे खुशी से
आ रहे हैं वो देखो मोहम्मद
आ रहे हैं वो देखो मोहम्मद
जिनके कांधे पे कमली है काली
आ रहे हैं वो देखो मोहम्मद
जिनके कांधे पे कमली है काली
महशर के रोज पेश खुदा होंगे जिस घड़ी
होगी गुनाह हजारों में इस दर्जा ब-ए-कली
आते हुए नबी को जो देखेंगे उम्मती
आते हुए नबी को जो देखेंगे उम्मती
एक दूसरे से सब ये कहेंगे खुशी खुशी
आ रहे हैं वो देखो मोहम्मद
जिनके कांधे पे कमली है काली
जिनके कांधे पे कमली है काली
आशिक ए मुस्तफा की अज़ा में है, अल्लाह अल्ला
ह कितना असर था हो, अल्लाह अल्लाह कितना असर था
आशिक ए मुस्तफा की अज़ा में है, अल्लाह अल्लाह कितना असर था
अरश वाले भी सुनते थे जिसको
अरश वाले भी सुनते थे जिसको
क्या अज़ा थी अज़ा ने बिलाली ने
अरश वाले भी सुनते थे जिसको
क्या अज़ा थी अज़ा ने बिलाली ने
सच्चा ये वाकया है अज़ा ने बिलाल का
एक दिन रसूल पाक से लोगों ने यूं कहा
या मुस्तफा अजान गलत देते हैं बिलाल
कहिए हुजूर आपका इसमें है क्या खयाल?
फरमाया मुस्तफा ने ये सच है तो देखिये
वक्त ए सहर की आज अजान और कोई दे
हज़रत बिलाल ने जो अजान ए सहर ना दी
कुदरत खुदा की देखो ना मुतलक सहर हुई
आए नबी के पास फिर असहाब ए बासफा
की अर्ज मुस्तफा से कि या शाह ए अम्बिया
है क्या सबब?
सहर ना हुई आज मुस्तफा जिब्राईल लाए ऐसे में पैगाम ए किब्रिया
पहले तो मुस्तफा को अदब से किया सलाम
बादस सलाम उनको खुदा का दिया पयाम
यूं जिब्राईल ने कहा खैरुल अनाम से
अल्लाह को है प्यार तुम्हारे गुलाम से
अल्लाह को है प्यार तुम्हारे गुलाम से
अल्लाह को है प्यार तुम्हारे गुलाम से
फरमा रहा है आपसे यूँ रब्बे जुल जलाल
फरमा रहा है आपसे यूँ रब्बे जुल जलाल
होगी ना सुबह देंगे ना जब तक अज़ा बिलाल
होगी ना सुबह देंगे ना जब तक अज़ा बिलाल
होगी ना सुबह देंगे ना जब तक अज़ा बिलाल
अरश वाले भी सुनते थे जिसको
अरश वाले भी सुनते थे जिसको
क्या अज़ा थी अज़ा ने बिलाली ने
क्या अज़ा थी अज़ा ने बिलाली ने काश पूर्णिम जा
या रे नबी में जीते जी हो बुलावा किसी दिन हो
जीते जी हो बुलावा किसी दिन
काश पूर्णिम जाया रे नबी में जीते जी हो बुलावा किसी दिन
हाल दिल मुस्तफा को सुनाऊं, हाल दिल मुस्
तफा को सुनाऊं, धाम करो उनके रोज़े की जाली
हाल दिल मुस्तफा को सुनाऊं, धाम करो उनके रोज़े की जाली
भर दो झोली मेरी या मोहम्मदी लौट कर मैं ना जाउंगा खाली
लौट कर मैं ना जाउंगा खाली