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Alakh Niranjan Adesh
Ashok Koli
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🇮🇳 Hindi · Original
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अलख निरंजन
माया लेके आए मच्छिंदर
झोली में युग भस्म अंबर
रुद्र माला वैराग्य छाया
भोग मोक्ष का भेद दिखाया
नाथ पंथ के दादा गुरु
काया पलटे सत्य शुरू
अलख निरंजन आदेश
एक ही संदेश आदेश
काल कर्म क्लेश भस्म जोगी
निर्विशेष आदेश, आदेश, आदेश
आगे आगे गोरख जागे
अलख निरंजन
काल का लेखा पल में जले
अघोर अग्नि में भाग्य ढले
ॐ ररम रम हूं हूं फट
कृ कालाग्न ये आदेश तत्
अलख निरंजन आदेश, आदेश, आदेश
जड़ से चित्तन टूटे हर बंधन
अलख निरंजन आदेश
शब्द सांचा, पिंड कांचा
चलो मंत्र ईश्वर वाचा
भगवा वेष हाथ में खप्पर
भैरव रूप शिव का जप कर
जहाँ जहाँ जाऊं नगर डगर
लगे वहाँ फिर जोगी मेला
शिव का धुना गोरख तापे
काल कंठक थर थर काँपे
हूँ फट, हूँ फट, हूँ फट
नवनाथ करे मेरी रक्षा
चारों युग में साथ की अक्षा
हनुमंत बलवंत करे भय का नाश
रोग शोक कटे पल में आज
रिद्धि सिद्धि आंगन आए
अन्नपूर्णा अन्न बरसाए
मैं न देह, मैं न नाम
मैं केवल ज्वाला, केवल राम
शब्द सांचा, पिंड कांचा
चलो मंत्र ईश्वर वाचा
अलख निरंजन आदेश, आदेश
ॐ क्री हूँ फट ॐ गुरुजी
गोरख जति मच्छेंद्र का चेला
शिव के रूप में दिखे अलबेला
कानों कुंडल गले में नादी
हाथ त्रिशूल नाथ है आदि
अलख पुरुष को करूं आदेश
जन्म जन्म के काटो कलेश
भगवा वेष हाथ में खप्पर
भैरव शिव का चेला
जहाँ जहाँ जाऊं नगर डगर
सब में समाया एक ही प्रकाश
ना ऊँचा कोई ना कोई नीचा
एक समान ज्योत काश
अलख निरंजन आदेश
शिव में जीव सहज ही लीन
अनंत से अनंत तक
पाय शिवत्व योगी प्रवीण
घट में ज्योत है ज्योत में घट
जो खोजे बाहर वो भीतर ही बसे
ॐ शिव गोरक्ष आदेश
आदेश, आदेश, आदेश