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Samjha Main Qismat Khul Gai
Mohammed Rafi
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🇮🇳 Hindi · Original
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Original
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Bilingual
समझा मैं क़िस्मत खुल गई
समझा मैं क़िस्मत खुल गई
मुझको राम, बुढ़िया मिल गई
समझा मैं क़िस्मत खुल गई
मुझको राम, बुढ़िया मिल गई
अरे, पहुँचा जब उसकी महफ़िल में
क्या-क्या अरमाँ थे दिल के, सब रह गए दिल में
समझा मैं क़िस्मत खुल गई
मुझको राम, बुढ़िया मिल गई
सोच रहा था मैं है मेरी महबूबा
चंदा का एक टुकड़ा
झूम के देखूँगा, चूम के देखूँगा
गोरा-गोरा मुखड़ा
सोच रहा था मैं है मेरी महबूबा
चंदा का एक टुकड़ा
झूम के देखूँगा, चूम के देखूँगा
गोरा-गोरा मुखड़ा
यही धुन थी, बसूँगा मैं जवाँ गालों के तिल में
क्या-क्या अरमाँ थे दिल के, सब रह गए दिल में
समझा मैं क़िस्मत खुल गई
मुझको राम, बुढ़िया मिल गई
देख सिंगार उसका मैं तो यही समझा
है कोई सूरत वाली
चेहरे की लाली को पौंछ के देखा तो
निकली बुढ़िया काली
देख सिंगार उसका मैं तो यही समझा
है कोई सूरत वाली
चेहरे की लाली को पौंछ के देखा तो
निकली बुढ़िया काली
दुखी बनके पड़ा हूँ मैं मोहब्बत की मंज़िल में
क्या-क्या अरमाँ थे दिल के, सब रह गए दिल में
समझा मैं क़िस्मत खुल गई
मुझको राम, बुढ़िया मिल गई
अरे, पहुँचा जब उसकी महफ़िल में
क्या-क्या अरमाँ थे दिल के, सब रह गए दिल में
समझा मैं क़िस्मत खुल गई
मुझको राम, बुढ़िया मिल गई