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Phagun Ke Din Char (Original)

Jyoti & Harish
Popularity · Low

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Lyrics

फागुन के दिन चार (काव्य) 23 Click To download this content फागुन के दिन चार होली खेल मना रे॥ बिन करताल पखावज बाजै अणहदकी झणकार रे। बिन सुर राग छतीसूं गावै रोम रोम रणकार रे॥ सील संतोखकी केसर घोली प्रेम प्रीत पिचकार रे। उड़त गुलाल लाल भयो अंबर, बरसत रंग अपार रे॥ घट के सब पट खोल दिये हैं लोकलाज सब डार रे। मीरा के प्रभु गिरधर नागर चरणकंवल बलिहार रे