Shikayat
Karya ., Akki On The Mic
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Lyrics
मैं लिखने को बैठा था तेरी शिकायत अभी
फिर याद आया, अपनों को बदनाम करते नहीं
ये दिल बोला, "जाने दे, आँखों को प्यारी है वो"
तो मैंने अपनी भी थोड़ी-सी शर्तें रखी
कि तेरे बिन अकेला ही सही मैं, अब ना दूजा चाहिए
मैं आँखें बंद करके लेटूँ, मुझको तू दिखाई दे
ये आँधी इश्क़ की जो ले गई है प्यार मेरा दूर
उसको ढूँढना है, पलकों से ये धूल हटाईए
मिलेगा वक़्त जो कभी तो ख़ुद से पूछना ज़रा
कि मेरी ग़लतियाँ थी क्या, जो दिल ये टूट-सा गया है
तेरा अपना ही तो था, मेरा नाम भी नहीं याद
और एक मैं हूँ जो अभी भी तुझको भूल ना सका
मैं मेरी आख़िरी साँसों में हूँ गुम
पर मेरी आख़िरी साँसों में भी तुम
मैं मेरी आख़िरी साँसों में हूँ गुम
पर मेरी आख़िरी साँसों में भी तुम
मुसाफ़िर मैं, मंज़िल की राहों में भटका हुआ
फिर याद, मंज़िल है अब किसी और की
सोचा, बुला लूँ दोबारा पर माँ ने कहा
कि "ग़ैरों की चीज़ों पे हाथ अपना रखते नहीं", damn
मैं लिखने को बैठा था तेरी शिकायत अभी
फिर याद आया, अपनों को बदनाम करते नहीं
ये दिल बोला, "जाने दे, आँखों को प्यारी है वो"
तो मैंने अपनी भी थोड़ी-सी शर्तें रखी
मिलोगी कभी हमें सुनहरी फ़िज़ाओं में
तो एक बारी हाथ ये मेरा थामना
मैं तन्हा हूँ भीड़ में ये दुनिया भी जीत के
चाहूँ एक बारी तुमसे हारना
कलम मैं नशे में उठाने से डरता हूँ अब
कि छोड़ो, अब क्या ही किसी को रुलाना भला
वो सोते हैं बेफ़िक्र होके, उन्हें क्या ख़बर
कि रातें शराबों में अपनी भी कटने लगी
मैं लिखने को बैठा था तेरी शिकायत अभी
फिर याद आया, अपनों को बदनाम करते नहीं
ये दिल बोला, "जाने दे, आँखों को प्यारी है वो"
तो मैंने अपनी भी थोड़ी-सी शर्तें रखी
मैं लिखने को बैठा था तेरी शिकायत अभी
फिर याद आया, अपनों को बदनाम करते नहीं
ये दिल बोला, "जाने दे, आँखों को प्यारी है वो"
तो मैंने अपनी भी थोड़ी-सी शर्तें रखी