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Shaam-E-Gam Kuchh (Vinod Sehgal)

Popularity · Low

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Lyrics

शाम-ऐ-ग़म कुछ उस निगाह-ऐ-नाज़ की बातें करो। बेखुदी बढ़ती ही चली है राज़ की बातें करो।। ये सुकूत-ऐ-नाज़ ये दिल की रगों का टूटना। ख़ामोशी में कुछ शिकस्त-ऐ-साज़ की बातें करो।। कुछ कफ़स की तीलियों से छन रहा है नूर सा। कुछ फ़ज़ा कुछ हसरत-ऐ-परवाज़ की बातें करो।। नक़हत-ऐ-ज़ुल्फ़ें परीशां दास्तान-ऐ-शाम-ऐ-ग़म। सुबहो होने तक इसी अंदाज़ की बातें करो।। शाम-ऐ-ग़म कुछ उस निगाह-ऐ-नाज़ की बातें करो। बेखुदी बढ़ती ही चली है राज़ की बातें करो ।। शाम-ऐ-ग़म कुछ उस निगाह-ऐ-नाज़ की बातें करो... ।।.देओल.।।