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Raabta (Siyaah Raatein)
Hamsika
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🇮🇳 Hindi · Original
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फैली थी सियाह रातें, आया तू सुबह ले के
बेवजह सी ज़िंदगी में जीने की वजह लेके
खोया था समन्दरों में, तन्हाँ सफीना मेरा
साहिलों पे आया है, तू जाने किस तरह ले के
फैली थी सियाह रातें, आया तू सुबह ले के
बेवजह सी ज़िंदगी में जीने की वजह लेके
खोया था समन्दरों में, तन्हाँ सफीना मेरा
साहिलों पे आया है, तू जाने किस तरह ले के
कुछ तो है तुझसे राबता, कुछ तो है तुझसे राबता
कैसे हम जाने हमें क्या पता
कुछ तो है तुझसे राबता
अब क्या है कहना, हमको है रहना
जन्नतें भुला के तेरी बाहों में पनाह ले के
फैली थी सियाह रातें, आया तू सुबह ले के
बेवजह सी ज़िंदगी में जीने की वजह लेके
रे सा नई सा दा रे सा प् ध नी सा रे सा नई सा दा रे सा प् ध नी सा
मेहरबानी जाते-जाते मुझपे कर गया
गुज़रता सा लम्हां एक दामन भर गया
तेरे नज़ारा मिला, रोशन सितारा मिला
तकदीर का जैसे कोई इशारा मिला
रूठी हुई ख्वाहिशों में, थोड़ी सी सुलह ले के
आया तू खामोशियों में, बातों कि जिरह ले के
खोया था समुन्दरों में, तन्हाँ सफीना मेरा
साहिलों पे आया है, तू जाने किस तरह हाँ ले के
फैली थी सियाह रातें, आया तू सुबह ले के
खामखां सी ज़िन्दगी में, जीने की वजह ले के
खोया था समन्दरों में, तन्हाँ सफीना मेरा
साहिलों पे आया है, तू जाने किस तरह ले के
कुछ तो है तुझ से राब्ता
कुछ तो है तुझ से राब्ता
कैसे हम जानें? हमें क्या पता
कुछ तो है तुझ से राब्ता
अब क्या है कहना? हमको है रहना
जन्नतें भुला के, तेरी बाँहों में पनाह लेके
फैली थी सियाह रातें, आया तू सुबह लेके
बेवजह सी ज़िंदगी में जीने की वजह लेके
I feel it inside
Don't know why, I feel it inside