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Mujhko Yaqeen Hain
Javed Akhtar
,
Jagjit Singh
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🇮🇳 Hindi · Original
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Lyrics
Original
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Bilingual
मुझको यक़ीं है, सच कहती थीं, जो भी अम्मी कहती थीं
मुझको यक़ीं है, सच कहती थीं, जो भी अम्मी कहती थीं
जब मेरे बचपन के दिन थे, चाँद में परियाँ रहती थीं
मुझको यक़ीं है, सच कहती थीं, जो भी अम्मी कहती थीं
एक ये दिन, जब अपनों ने भी हमसे नाता तोड़ लिया
एक ये दिन, जब अपनों ने भी हमसे नाता तोड़ लिया
एक वो दिन, जब पेड़ की शाख़ें बोझ हमारा सहती थीं
मुझको यक़ीं है, सच कहती थीं, जो भी अम्मी कहती थीं
एक ये दिन, जब सारी सड़कें रूठी-रूठी लगती हैं
एक ये दिन, जब सारी सड़कें रूठी-रूठी लगती हैं
एक वो दिन, जब "आओ, खेलें" सारी गलियाँ कहती थीं
मुझको यक़ीं है, सच कहती थीं, जो भी अम्मी कहती थीं
एक ये दिन, जब जागी रातें दीवारों को तकती हैं
एक ये दिन, जब जागी रातें दीवारों को तकती हैं
एक वो दिन, जब शामों की भी पलकें बोझल रहती थीं
मुझको यक़ीं है, सच कहती थीं, जो भी अम्मी कहती थीं
एक ये दिन, जब लाखों ग़म और काल पड़ा है आँसू का
एक ये दिन, जब लाखों ग़म और काल पड़ा है आँसू का
एक वो दिन, जब एक ज़रा सी बात पे नदियाँ बहती थीं
मुझको यक़ीं है, सच कहती थीं, जो भी अम्मी कहती थीं
जब मेरे बचपन के दिन थे, चाँद में परियाँ रहती थीं
मुझको यक़ीं है, सच कहती थीं, जो भी अम्मी कहती थीं