Manzil Ki Dhun Men
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Lyrics
मंज़िल की धुन मे झूमते गाते चले चलो
बिछड़े हुए दिलों को मिलाते चलो चलो
हाँ मिलाते चलो चलो
दो दिन की ज़िंदगी में कोई क्यूँ उठाये ग़म
कोई क्यूँ उठाये ग़म
नग़्में ख़ुशी के सब को सुनाते चले चलो
बिछड़े...
इन्सानियत तो प्यार मोहब्बत का नाम है
मोहब्बत का नाम है
इन्सानियत की शान बढ़ाते चलो चलो
बिछड़े हुए...
आज़ाद ज़िंदगी है तो बर्बाद क्यूँ रहे
बर्बाद क्यूँ रहे
बर्बादियों से दिल को बचाते चले चलो
बिछड़े हुए...
मंज़िल की धुन मे झूमते गाते चले चलो
बिछड़े हुए दिलों को मिलाते चलो चलो