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Kattarwaad
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🇮🇳 Hindi · Original
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हमरी ख्वाहिश और हमरी आरजू ये हय की दिल्ली में चक्का जाम हो
और सिर्फ दिल्ली मे ही नहीं। (परदेश मे)
बगिया, और जहा जिश शहर में मुसलमान कर सक्ता हे
मुसलमान हिन्दूस्तान के ५०० शहरो मे चक्का जाम कर सक्ता हे
ठीक हय? (ठीक हय?)
(प्लीज कोंट्रॉल)
हा मे हिन्दू, और ये देश हिन्दूस्तान हय!
प्रधान मंत्रि हिन्दू क्युंकि, बहू मते आबम हे
मुझे गर्व मेरि सोच मेरि रूह भी हिन्दू
तभी, मुह में हिन्दू हर वक्त जय श्री राम हे!
हमारा ही खाते हो तुम, फिर हमारा ही बिरोध?
राम मन्दिर के उपर तुमने बाबरी बनाया
जिसको शक उसकी काबर दंगा खोद, मेरा जायज़ है क्रोध!
जय श्री राम।।
धर्म की रक्षा की बात हो तो हाम डरते नाही
हाम वीर गती को प्रप्त हाम मरते नहि!
तुम धर्म के नाम पे खुद को मैनोरिटी मानते
खुद्को ही हो बाटते, बे शर्ते साहि क्यूं?
पर हम धरम की बात करे तो हम संगी, गुंडे, दंगाई
और किसने बराई दन्ग्बाद दुनिया मे सच्चाई होती कम नहि!
मानवता की मौत तुम! दानव ता की फौज तुम!
या कहना परेगा की आतंकबाद की कौन तुम?
कश्मीर में वही लाशे कितनी औरत कितने बच्चे
पर वो हिन्दू थे उस समय क्यूं मौन तुम?
कौन तुम??
तुम देश द्रोही बेश वोही
ईस देश की मिट्टी नहि तुम्हारे हाथ में पत्थर
फेक दो ये जवानो पर भाग्वानो पर
और हम सहते रहे आह: सेड स्टोरी।
अगर श्री राम ने हमे दया सिखायी
तो लक्ष्मण ने करना सिखाया हमे अन्त भी।
तुमने दिया जिन्ना को जन्म जाओ पकिस्तान
ये धरती स्वामी विवेकानन्द कि!
आरे अल्लाह के नाम पे
छाती पे बम लपेट के शहदद कि चाह नहि ये आदत तुम्हारी
लानत तुम्हारी लानत तुम्हारी सोच पे जी दुसरे धरम को कोचते!
जिहाद कि फार्सद भी पायदा बर है तुम्हारी।
और। और बुर्खे कि आर मे कितनी बर तुम बच कर
दिखा चुके असली मक्षद।
गो दस्तर, गौ भक्षक, १०० लस्करे ताई पर तुम्हारी कौन कि नासाल
आरे गाई को माता नहि तो मानो एक जनवर
तुम खाते उसको चिर कर उसमे भी जान ये जान कर
याद रखना ये पाप धुलेगा नहि छान कर
क्यूंकि उसकी जगा तुम्हारी पेट मे नहि उसकी जगह खुले मेदान पर।
(औह गड)
और। और कल कि ही बात है।
तुमने उस्कये कितने छात्र
भर्कये कितने दान्गे
जालाये कितनी बासे
फेराये कितने तिरंगे
लारि कितने जंग तुमने देश प्रेम के लिये
तुम्हारे देश प्रेम मे लग जाता इतनी आसानी से क्यूं जान्ग है?
तुम्हारे पूर्वजों हिन्दूस्तान के
फिर्र्भी तुम बोझ भरत मा कि शान पे।
तुम्हे भगवन से नफरत ना आर्जी से नफ्रात
सिधा कह क्यूं नहि देते तुम्हे प्यार पकिस्तान से?
ख्यर, हर सिक्के के दी पेहलू
सोचा पहले में केहलू।
मेने बोला तुने सहा
आब, तू बोल थोड़ा में सेहलू!
जय श्री राम! जय श्री राम!
ह: शायद हिन्दूस्तान के मतलब से तू रुबारु ही नहि डाम्ब फाक
हुज़ुरे बेवकूफ गो मूत्र का नशा काम कर।
हिन्दूस्तान का अर्थ हिन्दू नदी कि पर कि धर्ती
नाकी हिन्दूओ का स्थान पर तू
डाम्ब फाक या बोलू तुझे डाम्ब भक्त
तुझे दिखता ना भेद भाओ
तुझे लगते हाम साब हाम शकले?
तुझे दिखते हाम सबके हाथ मे कंकर
तेरी बात कर राहा हूं क्या आपनी वलिद से जो तुझसे बड़ा देश भक्त
भारत कि आर्मी मे, गर्मी मे, सर्दी मे, तेयनाद कश्मीर मे ईस वक्त
औह सरि कश्मीर मे अभी औउट अफ सम्पर्क
और भय मे जीना भयंकर
लेकिन ईस लोक तंत्र मे जमकर
होती मोब्लिंग जिंग, और भीर वीडियो बनाती
जय श्री राम चिल्लाती पुलिस चुप।
सरकर आंखों में पट्टी लगाती
ये राम राज्य नहि ये बनवास ये जंगल। ये जंगल।
तुम बनते गो रक्षक पर लगभग हर सराक पर
ईस मुल्ख मे जी रही गाई मर मर कर!
और जिस हुकुमत मे बलतकरि और अपराधी
राजनीती मे मिल जाये मेरा इमान नही देता इजाजत।
पर क्युंकि ओ तेरे ही मजव के जात
उनका खुलके समर्थन कर! क्यू?
अर्बूर का एक प्रतिक हे आका कुरान मे
जा जाके देख क्या लिखी मर्यादा बैद पुराण मे।
पहले झक खुद्के गिरे बन मे
पहले आपन तन ढ़ाक।
हा किया कुच लोगोने अल्लाह हु अक्बर बदनाम
पर शूनकार राम का नाम
वो दिन दुर नहि जब होन्गे कतल सरे आम
और प्रशाशन होगा मौन क्युंकि
सम्बिधान कि रिर को तोड कर चिर मारोर कर
करना चाहते ये हिन्दू राष्ट्र का निर्माण।
ये बनवास, ये जंगल। ये जंगल।
हिन्दुत्या के रक्षक या बोलू तुम्हे हिन्दुत्या के रक्षास
अगर सारवाइबल कि बात हो
एक मुस्लिम और एक गाई हो
तुम खा जाओगे एक मुसलमान को बेशर्त
ये बात शत प्रातिशाद सच!
और ये जामिन किसीकी बाप कि नहि
तो हामे ये भय नहि कि तुमहारा हिन्दुत्या
इस्लाम कि कबर खुदवा ना दे
भय ये कही कि तुम अपिजे आब्दुल कालाम का नाम भी
इतिहास से भूलबा ना दे
भय ये कही भगवा का भर भाईचारे को
ईस देश के बाहार भगवा ना दे।
अरी बचपन मे टीवी मे जय श्री राम सुनने को मिलता था
तो दिखते थे छाती चिरते हुये हानुमान।
और आज दिखते हे हाथ मे तलवार लिये हैवान शेयतान।
क्या शस्त्रो मे सश्त्रा ही बीरता कि पेहचान?
लेकिन बिलकुल। बिलकुल।
पेहलू और सिक्के के दो।
अलग हर बन्दे कि सोच।
तो क्यू ना इस्स कट्टरवाद जेह्नियाद को छोर
बारे भाईचारे कि ओर, इनसानियात कि ओर। इनसानियात कि ओर।
"ये आग लागाने वाले कौन है? वो उनके कापरो से ही पता चल जाता है"