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Roz Roz - Trending Version

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Lyrics

कभी कभी लागे रहा अनसुना जो भी मन में लागे कहा अनकहा कभी कभी लागे रहा अनसुना जो भी मन में लागे कहा अनकहा किनारे, किनारे पे रह गयी नइया रे सवालों भरे हो ये सारे नज़ारे रोज़ रोज़ आते हो आंखें क्यों चुराते हो है मुझे लगे जैसे खुद को ही छुपाते हो रोज़ रोज़ आते हो आंखें क्यों चुराते हो है मुझे लगे जैसे खुद को ही छुपाते हो ऐसा क्या भला मन में खल रहा