Raza
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Lyrics
डुबना चाटेह मुझे..
पर मई डूबा नही,
म्यूज़िक है हराम कहते..
पर खुदा से जुड़ा नही,
ये लाते वेव मई लाया..
हूँ पूरी ट्सुनामी,
लगानी आग थी तो लड़की को..
खुद मारी खुआड़ी,
मतलब करी है..
मेहनत भोथ,
सफ़र निकले..
पैदल भोथ,
क्यू मुझसे जल्के वक़्त..
ज़ाया कररा क्या मॅटर बोल..
रातें करदी एक जब जाके..
बरसी है रहमत दोस्त,
मेरा छोड़ मौला कामयाबी..
दे तू तेरा सोच,
सीकरे इलाही सफ़र मई..
निकले हम कफ़न बँधे,
लिखती उंगलियाँ हाथो के ..
मेरे सारे कदरदान है,
ये रॅपर मूह ंही लगते..
क्यू की ये सबा हाशर जाने,
जब भी निकले क़लम ंमुझसे..
वो बस खाली क़ातल माँगे,
मुझ करनी न्ही बीफ..
मुझे छाईए बस पीस,
मुझे चाहिए मोहब्बत..
जेसे हार्डिन हो एईद,
मेरे हिस्से की उमर..
मेरी मा को नसीब,
कर्दे मौला तू ही रहबर..
तू ही है मेरा हरीफ,
तू ही जाने दिल के हाल..
तू जाने ना दिल मे ग़लत मेरे,
अपना बेहतर सोचा..
तेरा बुरा न्ही है फराक बेटे,
मई लागू कोल्ड कुक..
भर लेना नरक मई से,
घर को और तुम होते अपने..
तो खुदसे ही साँझ लेते,
खैर मुझे अब क्सिसी से..
भी गीला ना है,
पर स्मभाल के चलता दुनिया..
साँपों का एक पिटारा है,
कलाकार हसके गुम को..
दिल ही दिल मई चुपाता है,
सुनने वालों का प्यार बस..
खुदा का एक इशारा है,
की होगा बेहतर सब..
हिम्मत कर लगा रह,
तू रोल रोके हसणेका..
अपना एकलागा मज़ा है,
दुनिया की भीड़ मई खुदको..
रखना तू बचा के,
कहीं एसा ना हों बाद मे..
गैरों मई खुदको तलाशे,
तू ज़ाया ना कर..
ये ज़िंदेगी तू ज़ाया ना कर,
तू इतने बुलंद हौल्से कर..
खुद खुदा पूछे रज़ा आकर..
के कहता की तू ज़ाया ना कर,
ये ज़िंदेगी तू ज़ाया ना कर..
तू इतने बुलंद हौल्से कर..
खुद खुदा पूछे रज़ा आकर..
डुबना चाटेह मुझे..
पर मई डूबा नही,
चुपाता मई अंधेरे मुजसे..
ज़्ीडा गहरा कुवा नई,
मई ठहरा नही कन की हे..
साथ मेरे दुआ कई,
मुश्किलों को भी हे मुझसे..
मोहब्बत होती जुड़ा न्ही,
रिस्ट की कला देख..
जो लिखूं मई वो बिकेगा,
रिज़क़ की परवा नई..
जो लिक्खा हे मो मिलेगा,
खवाब मे बोला लूटेगा..
पर ना वो सीखेगा,
खामोश महफ़िल मई पर..
अकेलापन मई चिकेगा,
आ पास बेत मेरे राज़..
की यह बातें सुन,
चाहता मंज़िल तो बेचैनी..
भरे रातें चुन,
ज़मीन को रोस्नी दे ..
इतन्नी की खुद आसमान,
लगने लगे फीका जेसे..
हो गये सितारे गुम,
खुशी को खोजुं कान्हा..
मई खो चुका,
मई क़ैदी अपनी सोच का..
मई बेअसर.. मई बहाया..
हिस्से का अपेने रो चुका,
मई रास्ते पे सो चुका..
साया था सर पे खूफ़ का,
भूखा चड़ा जो स्टेज पे..
फिर भी मिक पे मई मौजज़ा,
टूटे खिलोनो से भरा है..
कमरा आज भी,
मुसीबाट ने, बनाया बचपन...
मे ही आदमी..
मई घर से निकलु सोच के..
सफ़र है ये लास्ट राइड,
नाम हो मासूओर मॉस ..
जैसा मरने बाद भी,
गैरो की सुनके अपने ख्वाब..
तू दबाया ना कर,
महेलों को देख अपने..
झोपडे जले ना कर,
है हसरात अगर पाने की..
तुझे यह दो जहाँ..
है नुस्का एक ही..
मा- बाओ को सताया ना कर,
ये ज़िंदेगी तू ज़ाया ना कर,
तू इतने बुलंद हौल्से कर..
खुद खुदा पूछे रज़ा आकर..
के कहता की तू ज़ाया