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Saanjh Dhale Gagan Tale

Suresh Wadkar[SangeetPk.Com
Popularity · Low

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Lyrics

साँझ ढले गगन तले साँझ ढले गगन तले हम कितने एकाकी छोड़ चले नैनों को किरणों के पाखी साँझ ढले गगन तले हम कितने एकाकी पाती की जाली से झांक रही थी कलियाँ पाती की जाली से झांक रही थी कलियाँ गंध भरी गुनगुन में मगन हुई थीं कलियाँ इतने में तिमीर धँसा सपनीले नैनों में कलियों के आँसू का कोई नहीं साथी छोड चले नैनों को किरणों के पाखी साँझ ढले गगन तले हम कितने एकाकी जुगनू का पट ओढ़े आएगी रात अभी जुगनू का पट ओढ़े आएगी रात अभी निशीगंधा के सुर में कह देगी बात सभी निशीगंधा के सुर में कह देगी बात सभी कँपता है मन जैसे डाली अंबुवा की छोड़ चले नैनों को किरणों के पाखी साँझ ढले गगन तले हम कितने एकाकी साँझ ढले गगन तले हम कितने एकाकी