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Karta Hai Ek Rabi Dil Soz Ye Bayan. Pt. 1
Mohammed Rafi
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🇮🇳 Hindi · Original
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हरकत जो दिल की बंद हुई, आँख झुक गई
नब्ज़ें इधर रुकीं तो उधर साँस रुक गई
माँ ने कहा, "पुकार के मासूम चल दिया
अफ़्तार की ख़ुशी से भी महरूम चल दिया"
माँ-बाप लाश देखते थे अपने लाल की
मय्यत पड़ी थी सामने इक आठ साल की
आख़िर को रोज़ा खोलने का वक़्त आ गया
दोनों ने ग़म में बेटे के खाया ना कुछ पिया
नागाह दर पे आके सवाली ने दी सदा
साइल की शक्ल में था फ़रिश्ता खड़ा हुआ
आवाज़ दी कि ले लो फ़क़ीरों की तुम दुआ
मैं भी हूँ रोज़ा-दार, दो अल्लाह के नाम का
जिस दम सुनी फ़क़ीर की दोनों ने ये सदा
अफ़्तार को जो रखा था, साइल को दे दिया
साइल ने भीख ले के कहा, "माजरा है क्या?
मातम है घर में कैसा? ये मुझको भी दो बता"
साइल को अपने साथ पिदर घर में ले गया
फ़रज़ंद के जनाज़े को लाकर दिखा दिया
बच्चे की लाश देख के साइल ने कुछ पढ़ा
सीने पे हाथ रख के ये मुर्दे को दी सदा
"ऐ नन्हें रोज़ादार, तू अब रोज़ा खोल ले
ग़मगीन माँ खड़ी है, ज़रा माँ से बोल ले"
जुंबिश लबों पे होने लगी, आँख खोल दी
बच्चे को ज़िंदा देख के माँ दर लिपट गई
साइल ये कह के आँखों से रू-पोश हो गया
"भेजा हुआ मैं आया था परवरदिगार का"
था इम्तिहाँ का वक़्त, मुसीबत की ये घड़ी
जो उसपे जान देते हैं, मरते नहीं कभी
...मरते नहीं कभी