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jane waalon zara

mohd rafi
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Lyrics

जानेवालो ज़रा मुड़के देखो मुझे एक इंसान हूँ मैं तुम्हारी तरह जानेवालो ज़रा मुड़के देखो मुझे एक इंसान हूँ मैं तुम्हारी तरह जिसने सबको रचा अपने ही रूप से उसकी पहचान हूँ मैं तुम्हारी तरह, जानेवालो ज़रा इस अनोखे जगत की मैं तकदीर हूँ इस अनोखे जगत की मैं तकदीर हूँ मैं विधाता के हाथों की तस्वीर हूँ, एक तस्वीर हूँ इस जहाँ के लिए, धरती माँ के लिए शिव का वरदान हूँ मैं तुम्हारी तरह, जानेवालो ज़रा मन के अंदर छिपाए मिलन की लगन मन के अंदर छिपाए मिलन की लगन अपने सूरज से हूँ एक बिछड़ी किरन, एक बिछड़ी किरन फिर रहा हूँ भटकता मैं यहाँ से वहाँ और परेशान हूँ मैं तुम्हारी तरह, जानेवालो ज़रा मेरे पास आओ, छोड़ो ये सारा भरम मेरे पास आओ, छोड़ो ये सारा भरम जो मेरा दुख वो ही है तुम्हारा भी गम, है तुम्हारा भी गम देखता हूँ तुम्हे, जानता हूँ तुम्हे लाख अनजान हूँ मैं तुम्हारी तरह जानेवालो ज़रा मुड़के देखो मुझे एक इंसान हूँ मैं तुम्हारी तरह जिसने सबको रचा अपने ही रूप से उसकी पहचान हूँ मैं तुम्हारी तरह, जानेवालो ज़रा