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Junglee Jaati
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🇮🇳 Hindi · Original
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Original
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Bilingual
कला दुकान, कीमत लगा
मुनाफ़ा निकाल, ब्याज जमा
अजीब-गरीब से गाने बना
जो आसानी से बिके वो धुन बना
(जी, हुज़ूर) हाँ, जनाब, जी हुज़ूरी मैं नहीं
हमदम मेरे कई नाम है
कसम ख़ुदा की, ना गंदे काम है
मेरे सर इनाम है, खून सर-ए-आम
करम की बस्ती में ना हिसाब है
जो दिल है कला के रस्ते
कला के घर है किताबें मेरे
मैं सच लिखूँ, सच के सिवा ना कुछ
अनदेखी तस्वीरें रूबरू
जो कहूँ मैं, उससे बुरा सुनूँ
जो लिखूँ मैं, उससे बुरा सहूँ
मस्ताना मंज़िल के आगे
धंधे में मेरी कला नहीं
क़िस्मत का मारा सितारा
बेशक है असली कला का
दबती आवाज़ें सुनूँ मैं
चलती दिशाओं को देखूँ
कहीं जलती बस्ती में देखूँ
कहीं हँसती मस्ती में देखूँ
मैं जंगली जाति
मैं आदिवासी
इशारा काफ़ी
जंगली जाति, आदिवासी
जेब में साफ़ी, कोई नहीं माफ़ी यहाँ
इशारा काफ़ी मंगल काशी (शंभो)
मैं जंगली जाति, आदिवासी
सरगम से नज़्में बुनूँ मैं
धड़कन से हरकत करूँ मैं
रिश्तों के मतलब लिखूँ मैं
गुज़री कहानी सुनूँ मैं
कुदरत करिश्मे दिखाए
जीवन के नग़मे लिखूँ मैं
कसमें मोहब्बत गली के
दुनिया के मसले लिखूँ मैं
रस्सी जो तरसेंगे पागल
मर्ज़ी भी फ़र्ज़ी चलेंगे
ज्वाला चलाएगी अंदर
तारों में मक़सद दिखेगा
मेरे दस के दस बीच कोई नहीं
मेरे दस के डसने से बच बे
२१ में मस्ती करी थी
२५ में हरकत करेंगे
हरामी धंधा करेगा मेरे से
सौदा महँगा गिरेगा
लिखाई में रोज़ मरूँ कहीं
कलेजा ठंडा मरेला
मनमानी के हाल-ख़याल नेक
हुज़ूर, हिफाज़त में चलो
त्रिकोणी दिमाग में तीसरी आँख
मैं काला गुलाब, मैं कला संभालता हूँ
जो जैसा वैसा रहूँ मैं
हाँ, कड़वी बातें करूँ मैं
जो जैसा वैसा रहूँ मैं
कड़वी बातें करूँ मैं
नंगी दुनिया लिखूँ मैं
नंगा आदमी हूँ
जंगली जाति, आदिवासी
जेब में साफ़ी, कोई नहीं माफ़ी यहाँ
इशारा काफ़ी मंगल काशी (शंभो)
मैं जंगली जाति, आदिवासी
जंगली जाति, आदिवासी (जंगली जाति)
जेब में साफ़ी, कोई नहीं माफ़ी
इशारा काफ़ी मंगल काशी (शंभो)
मैं जंगली जाति, आदिवासी (आदिवासी)