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Humne Wahin Lagaya Dil
Badshah, Devv Sadaana, Kunaal Vermaa, Krish Mondal, Kishore Mondal, Hiten & Ipsitaa
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ज़माने की तरह हम भी तोड़े हैं गए
ऐसे तन्हा तो ना थे, तन्हा छोड़े हैं गए
दे-दे हमको माफ़ी, कर बैठे गुस्ताख़ी
होता है दुख काफ़ी, बाबू, पछताए
दिल में सब रखते हैं, ख़ुशियों को तरसते हैं
ख़ुद पे ही हँसते हैं, कहाँ मुँह को छुपाएँ?
ख़ैर है, यारों, कम-से-कम जान से जा ना पाए हम
इनकार के बहाने कई बार करते-करते
हमने वहीं लगाया दिल, जहाँ दिल लगाना मना था (हाय)
आख़िर वहीं किए सज्दे, जहाँ सर झुकाना मना था (हाय)
क्यूँ ज़िंदगी बिता दी, जहाँ पे इक पल बिताना मना था? (क्यूँ?)
क्यूँ उस गली में रहते थे हम, जहाँ रोज़ जाना मना था? (हाय)
मेरे चैन के चिथड़े-चिथड़े हुए, इस दिल के टुकड़े कितने हुए
मेरी क़लम के आँसू बहने लगे इस नज़म को लिखते-लिखते हुए
हर साँस गवाही भरती मेरी कि प्यार ना करियो, राजा, ओय
सुर ऐसे-ऐसे लगते हैं जब बजे प्यार का बाजा, ओय
बेदर्दी ने नशा कराया जो, उस नशे में झूमूँ सारा दिन
दिल टूटा लेके हाथों में मैं मज़े में घूमूँ सारा दिन
अब कोई भी काम ना आए, रब ही तेरी जान बचाए
तू मुझे उनमें ही फँसता दिखे है, जो ख़ुद तूने ही जाल बिछाए
अब नहीं तेरी आँखों में मस्ती, तू बस है बहानों की बस्ती
तेरी हर एक बात है सस्ती, तुझ पे तो रोना भी ना आए
हमने वहीं लगाया दिल, जहाँ दिल लगाना मना था (हाय)
आख़िर वहीं किए सज्दे, जहाँ सर झुकाना मना था (हाय)
क्यूँ ज़िंदगी बिता दी, जहाँ पे इक पल बिताना मना था? (क्यूँ?)
क्यूँ उस गली में रहते थे हम, जहाँ रोज़ जाना मना था? (हाय)