Main Ek Sadi Se
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Lyrics
मैं एक सदी से बैठी हूँ
मैं एक सदी से बैठी हूँ
इस राह से कोई गुज़रा नहीं
कुछ चाँद के रथ तो गुज़रे थे
कुछ चाँद के रथ तो गुज़रे थे
पर चाँद से कोई उतरा नहीं
मैं एक सदी से बैठी हूँ
मैं एक सदी से बैठी हूँ
दिन-रात के दोनों पहिये भी
कुछ धूल उड़ा कर बीत गए, बीत गए
दिन-रात के दोनों पहिये भी
कुछ धूल उड़ा कर बीत गए
मैं मन आँगन में बैठी रही
मैं मन आँगन में बैठी रही
चौखट से कोई गुज़रा नहीं
मैं एक सदी से बैठी हूँ
मैं एक सदी से बैठी हूँ
आकाश बड़ा बूढ़ा बाबा
सब को कुछ बाँट के जाता है, जाता है
आकाश बड़ा बूढ़ा बाबा
सब को कुछ बाँट के जाता है
आँखों को निचोड़ा मैंने बहुत
आँखों को निचोड़ा मैंने बहुत
पर कोई आँसू उतरा नहीं
मैं एक सदी से बैठी हूँ
मैं एक सदी से बैठी हूँ