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Admi Jo Kahta Hai
Kishore Kumar
Popularity · Moderate
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🇮🇳 Hindi · Original
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कभी सोचता हूँ, "के मैं कुछ कहूँ"
कभी सोचता हूँ, "के मैं चुप रहूँ"
आदमी जो कहता है, आदमी जो सुनता है
ज़िंदगी भर वो सदाएँ पीछा करती हैं
आदमी जो कहता है, आदमी जो सुनता है
ज़िंदगी भर वो सदाएँ पीछा करती हैं
आदमी जो देता है, आदमी जो लेता है
ज़िंदगी भर वो दुआएँ पीछा करती हैं
कोई भी हो, हर ख़ाब तो सच्चा नहीं होता
कोई भी हो, हर ख़ाब तो सच्चा नहीं होता
बहुत ज़्यादा प्यार भी अच्छा नहीं होता
कभी दामन छुड़ाना हो, तो मुश्किल हो
प्यार के रिश्ते टूटें तो, प्यार के रस्ते छूटें तो
रास्ते में फिर वफ़ाएँ पीछा करती हैं
आदमी जो कहता है, आदमी जो सुनता है
ज़िंदगी भर वो सदाएँ पीछा करती हैं
कभी-कभी मन धूप के कारण तरसता है
कभी-कभी मन धूप के कारण तरसता है
कभी-कभी फिर झूम के सावन बरसता है
पलक झपके यहाँ मौसम बदल जाए
प्यास कभी मिटती नहीं, एक बूँद भी मिलती नहीं
और कभी रिमझिम घटाएँ पीछा करती है
आदमी जो कहता है, आदमी जो सुनता है
ज़िंदगी भर वो सदाएँ पीछा करती हैं
आदमी जो देता है, आदमी जो लेता है
ज़िंदगी भर वो दुआएँ पीछा करती हैं