Chapa Dhan Ho
Pawan Singh • Shivani Singh
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Lyrics
ए!
का ह हो?
बतिया बूझऽ
का बूझीं?
(सरदिया ना लागी)
ए (का ह?)
ए, हेने आवऽ
बइठल ओसरवा से आजा ना room में
चानी जनानी संगे काटऽ monsoon में, आवऽ ना
बइठल ओसरवा से आजा ना room में
चानी जनानी संगे काटऽ monsoon में (हनुँ)
हो, चलऽ कमरे के भीतरे, हमहू बानी हीटरे
मजा तोके मिली जइसे आगी (हाँ)
त चापऽ, धन हो...
चापऽ, धन हो, सरदिया ना लागी
मजा मिली त हरदिया ना लागी
चापऽ, धन हो, सरदिया ना लागी
आवऽ, भगा द जरइया के
काम नाहीं परे रजइया के
हउवऽ पतवार, ए भतार, तू हमार
बन जा खेवइया तू नइया के
पड़ऽ ता एने जाड़, रानी, Shimla के हो
थूकी के अंगे आवऽ तानी विमला के हो
सजल व्यंजन, करे द मनोरंजन
मनवा भइल बा हमरो बागी
त चापऽ, धन हो...
चापऽ, धन हो, सरदिया ना लागी
मजा मिली त हरदिया ना लागी
चापऽ, धन हो, सरदिया ना लागी
मेहर के होते काहे काँपऽ तारऽ?
देह कठुवाइल, खाली ढाँपऽ तारऽ
चूल्ही में लौना डाली तापऽ तारऽ
बानी बोलावत त श्रापऽ तारऽ
खोल के होने फेंक देनी inner, ए जानू
पलंगिये प होई आज dinner, ए जानू
पीलऽ प्रेम रस, गोरी, कोरवे में कस, गोरी
तबे नु भाग, धनी, जागी
त चापऽ, धन हो...
चापऽ, धन हो, सरदिया ना लागी
मजा मिली त हरदिया ना लागी
चापऽ, धन हो, सरदिया ना लागी
सरद के दवाई त मरदे नु होला