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Zindegi Hosh Mein

KK; Zubeen Garg
Popularity · Low

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Lyrics

बिखरे सभी सपने है बिछड़े सभी अपने है आए बेज़ार मौसम कोइ ख़ुशी मिल गए ग़म बिखरे सभी सपने है बिछड़े सभी अपने है आए बेज़ार मौसम कोइ ख़ुशी मिल गए ग़म ज़िंदगी होश मे ही नही (ज़िंदगी) ज़िंदगी होश मे ही नही हम नही जानते थे बात ये खून दिल का बहेगा आँखो से थी कहाँ ये खबर लूट जाएगा मेरा जहाँ रेह जाएगा सिर्फ अँधेरा बस एक पल मे (एक पल मे) ज़िंदगी होश मे ही नही (ज़िंदगी) ज़िंदगी होश मे ही नही ख़ाली ख़ाली दिलो की दास्ताँ चल दिए है न जाने सब कहाँ अज़नबी रेह गुज़र और मीलो है तन्हाईयाँ दुनिया ही बदली हमारी बस एक पल मे (एक पल मे) ज़िंदगी होश मे ही नही (ज़िंदगी) ज़िंदगी होश मे ही नही बिखरे सभी सपने है बिछड़े सभी अपने है आए बेज़ार मौसम कोइ ख़ुशी मिल गए ग़म ज़िंदगी होश मे ही नही (ज़िंदगी) ज़िंदगी होश मे ही नही ज़िंदगी, ये ज़िंदगी, ज़िंदगी ज़िंदगी, ये ज़िंदगी, ज़िंदगी ज़िंदगी, ये ज़िंदगी, ज़िंदगी (बिखरे सभी सपने है)