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Neelkanth Naad
Amit Mishra
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🇮🇳 Hindi · Original
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गिरीशं गणेशं गले नीलवर्णम्
गजेन्द्राधिरूढ़म् गणातीत रूपम्
गिरीशं गणेशं गले नीलवर्णम्
गजेन्द्राधिरूढ़म् गणातीत रूपम्
भवं भास्वरं भस्मना भूषिताग
भवानी कलत्रं भज पंचवक्त्रम्
कंठ में सर्पों का है हार
भस्म ही जिनका है श्रृंगार
दिशा को बना वसन ओढ़े
भाए मन बेल और मंदार
सूर्य, सोम, वरूणानिल सेवित
यज्ञ-होम में बसते जो
नीलकंठ, गौरीपति
अविनाशी हो तेरी जय-जयकार
नीलकंठ, गौरीपति
अविनाशी हो तेरी जय-जयकार
नीलकंठ, गौरीपति
अविनाशी हो तेरी जय-जयकार
पशूनां पतिं पापनाशम् परेशं
गजेन्द्रस्यक कृत्तिं वसानं वरेण्यम्
जटाजूटमध्ये स्फुरद्गाङ्गवारिं
महादेवमेकं स्मरामि स्मरामिम्
कल्प-कल्प में जग-रचना का
परिवर्तन करने वाले
हर एक दुख से दुखी जनों का
उद्धारण करने वाले
रश्मि सुखों की जीवन में
ऐसी झिलमिल बिखराई है
जीवन को प्रभु तुमने ही तो
नवल राह दिखलाई है
छाँव में अपनी मुझको रख लो
जग के पालनहार
नीलकंठ, गौरीपति
अविनाशी हो तेरी जय-जयकार
नीलकंठ, गौरीपति
अविनाशी हो तेरी जय-जयकार
नीलकंठ, गौरीपति
अविनाशी हो तेरी जय-जयकार
शिवकान्त शंभू शशांकार्ध मौले
महेशान शूलिन् जटाजूटधारिन्
त्वमेको जगत व्याप्ते विश्वरूप
प्रसीद प्रसीद प्रभो पूर्णरूप
ये जग है काँटों का वन
पर मैं क्यों समझ न पाया
इस जीवन-जंजाल में भोले
क्यों मुझको उलझाया
व्याकुल मन और पीड़ित तन
अब राह तुम्हीं दिखलाओ
इस विपदा में गिरिजापति
मेरी रक्षा कर जाओ
शरण में अपनी ले लो प्रभु
तुम ही जीवन आधार
नीलकंठ, गौरीपति
अविनाशी हो तेरी जय-जयकार
नीलकंठ, गौरीपति
अविनाशी हो तेरी जय-जयकार
नीलकंठ, गौरीपति
अविनाशी हो तेरी जय-जयकार
नीलकंठ, गौरीपति
अविनाशी हो तेरी जय-जयकार