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Shiv Kailasho Ke Vasi

Rishabh Sambhav Jain
Popularity · Low

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Lyrics

चंद्रमा विराजे माथे, हाथ तीर शूल साजे चंद्रमा विराजे माथे, हाथ तीर शूल साजे जटा में गंगा सोहे है, पार्वती मन मोहे है नैन मूंद ध्यान लगावे, ब्रह्मांड आप चलावे आप बसे हर कण-कण में, भोलेनाथ कहावे भोलेनाथ कहावे, भोलेनाथ कहावे तेरे कैलाशों का अंत न पाया तेरे कैलाशों का अंत न पाया अंत बेअंत तेरी माया ओ भोले बाबा, अंत बेअंत तेरी माया चार दिशाओं में तू है, नाथ हवाओं में तू है रंग फिजाओं में तू है, गहन घटाओं में तू है भोले तेरी छाया में जीना भी है और मरना शिव कैलाशों के वासी, धौली धारों के राजा शंकर संकट हरना शिव कैलाशों के वासी, धौली धारों के राजा शंकर संकट हरना शंकर संकट हरना बेल की पत्तियां, भांग धतूरा बेल की पत्तियां, भांग धतूरा शिवजी के मन को लुभाए ओ भोले बाबा, शिवजी के मन को लुभाए चांद परिक्रमा लगावे, सूर्य तेज जिनसे पावे धार ले रूप भयंकर, काल जो निकट भी आवे भोले तेरे हाथों में, जीवन ये अर्पण है करना शिव कैलाशों के वासी, धौली धारों के राजा शंकर संकट हरना शिव कैलाशों के वासी, धौली धारों के राजा शंकर संकट हरना शंकर संकट हरना