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Kabhi-Yun-Bhi-Aa-Meri-Aankh-Mein - Bashir Badr
Jagjit Singh
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🇮🇳 Hindi · Original
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Lyrics
Original
Translation
Bilingual
कभी यूँ भी आ मेरी आँख में कि मेरी नज़र को ख़बर ना हो
कभी यूँ भी आ मेरी आँख में कि मेरी नज़र को ख़बर ना हो
मुझे एक रात नवाज़ दे...
मुझे एक रात नवाज़ दे, मगर उसके बाद सहर ना हो
कभी यूँ भी आ मेरी आँख में कि मेरी नज़र को ख़बर ना हो
वो बड़ा रहीम-ओ-करीम है, मुझे ये सिफ़त भी अता करे
वो बड़ा रहीम-ओ-करीम है, मुझे ये सिफ़त भी अता करे
तुझे भूलने की दुआ करूँ...
तुझे भूलने की दुआ करूँ तो दुआ में मेरी असर ना हो
कभी यूँ भी आ मेरी आँख में कि मेरी नज़र को ख़बर ना हो
कभी दिन की धूप में झूम के, कभी शब के फूल को चूम के
कभी दिन की धूप में झूम के, कभी शब के फूल को चूम के
यूँ ही साथ-साथ चलें सदा...
यूँ ही साथ-साथ चलें सदा, कभी ख़त्म अपना सफ़र ना हो
कभी यूँ भी आ मेरी आँख में कि मेरी नज़र को ख़बर ना हो
मेरे पास मेरे हबीब आ, ज़रा और दिल के करीब आ
मेरे पास मेरे हबीब आ, ज़रा और दिल के करीब आ
तुझे धड़कनों में बसा लूँ मैं...
तुझे धड़कनों में बसा लूँ मैं, कि बिछड़ने का कभी डर ना हो
कभी यूँ भी आ मेरी आँख में कि मेरी नज़र को ख़बर ना हो
मुझे एक रात नवाज़ दे...
मुझे एक रात नवाज़ दे, मगर उसके बाद सहर ना हो
कभी यूँ भी आ मेरी आँख में कि मेरी नज़र को ख़बर ना हो