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Sankatmochan Hanuman
Smokey, Raanjha
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🇮🇳 Hindi · Original
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राम जी ने कहा, "हनुमान, अगर सूर्य निकल गया तो लक्ष्मण मर जाएगा"
हनुमान जी ने कहा, "प्रभु, सूर्य देव मेरा स्वभाव जानते हैं
जब तक बूटी लेकर नहीं आऊँगा, सूरज को उगने नहीं दूँगा"
राम जी रोते-रोते कह रहे हैं, "हनुमान, मौत आगे बढ़ रही है"
"प्रभु, आप कहते हैं मौत लक्ष्मण को खा जाएगी?
मैं आपकी कसम खा के कहता हूँ, आज मौत को ही मार दूँगा
दुनिया में कभी कोई मरेगा ही नहीं"
हनुमान के होते प्रभु आपने सोच लिया ये कैसे कि
यमराज आज स्वयं प्राण हमारे लक्ष्मण जी के ले लेंगे?
क्या नहीं भरोसा आपको आपके दास की शक्ति पे प्रभु?
मैं पृथ्वी उथल-पुथल कर दूँ, आप एक बार जो कह देंगे
हाँ, आज अगर हो आज्ञा तो विधि का हर विधान पलट दूँ
आप कहो "संजीवनी" क्या, मैं चंद्र निचोड़ के अमृत ला दूँ
काल हो चाहे सामने आज, ना लखन को कुछ होने दूँगा
और आप कहते हो "मौत आएगी?" मैं मौत के प्राण ही ले लूँगा
ये शक्ति ना मेरी काम की, जो ना काम आए मेरे राम की
आज तो लंकापति भी हठ की क्षमता देखेगा हनुमान की
हाँ, वो सूर्य देव तो जानते हैं बजरंगी के निश्चय की क्षमता
अगर आज हुए वो उदय, तो पृथ्वी का अंतिम सूर्योदय होगा
अस्त होंगे वो, त्रस्त होंगे, मेरे क्रोध की अग्नि में भस्म होंगे वो
बाल्यकाल में ग्रास थे छोड़ा, अब तो पूरे नष्ट होंगे वो
निश्चिंत रहिए आप प्रभु, अभी जीवित है ये दास प्रभु
मैं भोर से पहले ले आऊँ संजीवनी आपके पास प्रभु
हाँ, गाड़ के पैरों, ले छलांग, रख पीठ गदा, चले हनुमान
तुझी धरती प्रलय हो जैसे, और आकाश में गूँजे "जय श्री राम"
राम-रामम जपति हनुमान, अतुलित बलधामम हनुमान
महाकाल शंभू अवतार हो, मृत्यु रूपी कालो हनुमान
जपे "राम, राम, राम" बजरंगबली, अतुलित बलधाम बजरंगबली
अवतार रुद्र महाकाल शंभू, मृत्यु के काल बजरंगबली
सिय राम मिलाए बजरंगबली, पुनः लखन जियाए बजरंगबली
श्रीराम रमे है रोम-रोम, सीना फाड़ दिखाए बजरंगबली
बजरंगबली, बजरंगबली
बजरंगबली, तेरी जय हो जय बजरंगबली
खबर सुनी जब बजरंगी की, हिल गई लंका लंकेश्वर की
सुबह से पहले हनुमान ही ला सकता है संजीवनी बूटी
शक्ति की उसके था नहीं, वो तो मृत्यु से भी डरता नहीं है
ना मर्कट वो साधारण, उसके जैसा कोई दूजा नहीं है
घबराया दशानन भी, भेजा कालनेमी को मार्ग में उनके
जो राम नाम जपे साधु बन, हनुमान रुके नाम राम का सुनके
छल से मार देगा कालनेमी हनुमान को, रावण सोच लगाई
बजरंगी ने एक प्रहार से दैत्य फाड़ फैंका लंका की सभा में
रावण आज तू बाधा भेज, हाँ, एक से भी तू ज्यादा भेज
सौगंध मुझे है राम की, लंका लौटूंगा बूटी समेत
ना किया विलंब है, द्रोणागिरी संजीवनी बूटी को ना जान दे
गाड़ के हाथ धरा में चले, उखाड़ लें पर्वत एक हाथ से
ना माथे पे एक बूंद पसीना, चेहरे पे कोई एक शिकन ना
एक हाथ में गदा, एक में पर्वत, पर मुस्कान रुके ना
चले मारुति वायु गति से, क्षण भर में ही पहुँच गए लंका
प्राण बचाए लखन के, फिर से बजा दिया राम नाम का डंका
हरषि राम भेंटेउ हनुमाना, कृतग्य प्रभु परम सुजाना
तुरत बैद तब कीन्ह उपाई, उठि बैठे लछिमन हरषाई
हृदयँ लाइ प्रभु भेंटेउ भ्राता, हरषे सकल भालु कपि ब्राता
कपि पुनि बैद तहाँ पहुँचावा, जेहि बिधि तबहिं ताहि लइ आवा
राम-रामम जपति हनुमान, अतुलित बलधा-
राम-रामम जपति हनुमान, अतुलित बलधामाम, हनुमान
महाकाल शंभूरवतारः, मृत्यु रूपी कालो हनुमान
राम, राम, बजरंगबली, अतुलित बलधाम
राम, राम, बजरंगबली, अवतार रुद्र महाकाल शंभू, मृत्यु के काल बजरंगबली
सिय राम मिलाए बजरंगबली, पुनः लखन जिए बजरंगबली
श्रीराम रमे है रोम-रोम, सीना फाड़ दिखाए बजरंगबली