Skip to content

KOH-QAF

Popularity · Low

YouTube

Searching YouTube...

Lyrics

मैं कोह-क़ाफ़ों में फिरता हूँ आवारा कभी मकदूनिया, कबहूँ बुख़ारा मैं उस पर्दा नशी को ढूँढता हूँ कभी तो महजबी का हो नज़ारा मैं कोह-क़ाफ़ों में फिरता हूँ आवारा के क्या रुख़सार की कहिए पड़ी सी हुबहू थी कोई ख़ुशबू नशीली सी भी उसके चार सू थी के जन्नत मैं बना लिबास उसका के वह फ़िरदौस का कोई सितारा मैं कोह-क़ाफ़ों में फिरता हूँ आवारा कभी मकदूनिया, कबहूँ बुख़ारा मैं सड़के जाऊँ शर्मा ने से परदादारियों से फे' डिक्री सर्द मुस्काहट सुर्ख़ शिंगारियों से ये दिल आज़ाद है, बेज़ार भी है के वह जलवा दिखाना फिर दुबारा मैं कोह-क़ाफ़ों में फिरता हूँ आवारा कभी मकदूनिया, कबहूँ बुख़ारा हाँ, हाँ कसक सी है यह दिल में के मैं अब ईरान जाऊँ मैं ढूँढूँ मिस्र में उसको या फिर यूनान जाऊँ? कहीं से दिलरुबा आवाज़ दे-दे हँसीं आँखों का मिल जाये इशारा मैं कोह-क़ाफ़ों में फिरता हूँ आवारा कभी मकदूनिया, कबहूँ बुख़ारा किसी शायर का ख़त आया के वह लाहौर से है मुझे शक है वह मेरे गाँव से बाजरावर से है उसी पंजाब की पुरनूर मलिका कोई "सरताज" है उसका सहारा मैं कोह-क़ाफ़ों में फिरता हूँ आवारा कभी मकदूनिया, कबहूँ बुख़ारा मैं उस पर्दा नशी को ढूँढता हूँ कभी तो माहजबी का हो नज़ारा कभी तो माहजबी का हो नज़ारा मैं कोह-क़ाफ़ों में फिरता हूँ आवारा