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Zubaida

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Lyrics

बेचारा, दिल बेचारा तुझसे कर सामना नी पारा कोई मौका, न गुंजाइश, न चारा मुझसे तेरे लिए ख़त लिखवा रा बेचारा, दिल बेचारा कुछ दिनों से मेरे हाथ नी आरा कोई मौका, न गुंजाइश, न चारा ऐनवें अपना घमंड घिसवा रा ऐसा भी होता है? कामदेव भी रोता है? सोचू तेरे बारे में तो सीने में कुछ होता है ना कोई समझौता है, ना मेरा दिल इकलौता है उतर कर बात करो पहचान तुमने जो मुखौता है जुबैदा, जुबैदा क्या पता, किया तुमने कैसा जुबैदा, जुबैदा मारे अखियों से देखो तू ऐसा ना शौहरत, ना पैसा कुछ भी नहीं तेरे हुस्न जैसा जुबैदा, जुबैदा क्या पता, किया तुमने कैसा? हवाओं में आज कुछ बहुत ही गलत है मेरा जी घबराए जैसी जैसी आरी रात निकट है अकेली है क्या तू? क्या मैं घर आ सकता हूं? आराम से बैठा के तुझे स्क्रीनशॉट दिखा सकता है? ऐसा भी होता है? क्या मर्द भी रोता है? सोचू तेरे बारे में तो चाटी में कुछ होता है ना कोई समझौता है बस सच कहने का मौका है उतर कर बात करो पहचान तुमने जो मुखौता है जुबैदा, जुबैदा क्या पता, किया तुमने कैसा जुबैदा, जुबैदा मारे अखियों से देखो तू ऐसा ना शौहरत, ना पैसा कुछ भी नहीं तेरे हुस्न जैसा जुबैदा, जुबैदा क्या पता, किया तुमने कैसा? अक्सर आवाज़ों में बिखरे अल्फाज़ों में क्या लगता है, किसके बारे में लिखता हूं इन गांवों में? कैसी असमंजस है क्या ये सब संभव है तेरे इर्द गिर्द बना रखा मैंने जिंदगी का मतलब है दे पता वक्त इसे थोड़ा और शायद ना ऐसा होता हो जाता वैसे के बदले कुछ ऐसा तो क्या जाने कैसा होता शायद हम पागल हैं बचपन से घायल हैं जब बिन पूछे बरसें ये बादल हैं तो मुझे इससे नफरत है सरदीली रातों में गंभीर सी बातों में मिल जाते हम, न देख सको तुम मुझे मेरी आँखों में कैसा अब रोना है? क्या पाना है? साढ़े आठ का था मैं समझ लिया जब जो होना है वो होना है जुबैदा, जुबैदा क्या पता, किया तुमने कैसा जुबैदा, जुबैदा मारे अखियों से देखो तू ऐसा ना शौहरत, ना पैसा कुछ भी नहीं तेरे हुस्न जैसा जुबैदा, जुबैदा क्या पता, किया तुमने कैसा आह साले, तूने भी तो किया है इतना पे धोखा अब पता चला कैसा लगता है? तेरा कर्म बैलेंस हुआ है, और कुछ नहीं है ये चल, कोई नी कम से कम आपने गाना अच्छा लिया ध्यान रखना गहरी सांस लें और आशीर्वाद दें