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Haare
Noor Chahal
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Bilingual
सुबह की अज़ानें नींद से जगाए
और एक चेहरा नज़रों के आगे से गुज़र जाए
चाँद सी सूरत देख ना पाए
रब से करे वो फ़रियादें, कुछ लफ़्ज़ों में कहती जाए
हाय, इतनी मासूम सी
हाय, दिलकश, दिलशाद सी
हाय, मैं तो सारी काएनात, जायदाद
दिन, ये रात वारूँ तुझ पे, हाय
हम तो जीत के जहाँ तुझसे हारे
नज़ारे फीके तेरे आगे, रोशन सितारे
सितारे सी तू चमके गगन में
ना छुपा रे, छुपा रे ख़ुद को
चाहूँ रुख़ से पर्दा उतारे, उतारे
हारे, हारे, हारे, तुझ पे हारे
देखती हूँ मैं भी रोज़ाना बस आँख चुरा के
जान के बने तू अनजाना मेरी नींद उड़ा के
कैसी है ये मजबूरी, बात मेरी आधी-अधूरी
आज कहनी है ज़रूरी तुमको मेरे पास बैठा के
हाय, जब तू मुस्काए
हाय, दिल फिसलता जाए
हाय, और थोड़ा शरमाए, तुमसे कहता
हम तो जीत के जहाँ तुझसे हारे
नज़ारे फीके तेरे आगे, रोशन सितारे
सितारे सी तू चमके गगन में
ना छुपा रे, छुपा रे ख़ुद को
चाहूँ रुख़ से पर्दा उतारे, उतारे
हारे, हारे, हारे, तुझ पे हारे
जो तू ना दिखे, ये दिन भी ना ढले
तू जो ना हो तो हवाएँ ना चलें
टहनी पे बैठी कोयलों को सुन
कह रही हैं गुनगुना के तुझसे ये
हैं कैसी मेरे दिल की उलझनें?
तेरे बिना मेरी साँस ना चले
तेरे बिना लगे फीकी सरगमें
जैसे-तैसे कट रहे हैं पल मेरे
क्यूँ कुछ ना बोले रे? छूने दे हौले से
है तन्हा हर एक रात, बरसात बिन तेरे
तेरे ना होने से, दिल के हर कोने से
निकले है फ़रियाद, बर्बाद
हम तो जीत के जहाँ तुझसे हारे
नज़ारे फीके तेरे आगे, रोशन सितारे
सितारे सी तू चमके गगन में
ना छुपा रे, छुपा रे ख़ुद को
चाहूँ रुख़ से पर्दा उतारे, उतारे
हारे, हारे, हारे, तुझ पे हारे