Skip to content

KHER RAKHNA

Popularity · Low

YouTube

Searching YouTube...

Lyrics

घर से निकलूं रब का नाम लेके साथ बार फुल स्पीड खींची हुई गाड़ी, हाथ बाहर छुरा मौत मैं, फिर भी मेरे दांत बाहर मां बोली गाड़ी धीमी रखा कर लाख बार पर मैं दाग ही बना मैं सुनूं क्यों ना किसी की, बागी बना क्यों ना कोई गिनती रही, कैसे पीते-पीते खुद ही एक साकी बना मुझे बोला मैनेजर, लेबल डील फेंक रहा और मैं बैठा हुआ दो घंटे रील्स देख रहा मैं सोचूं पी लूं घूंट कड़वा, या फिर हो जूं बेपर्दा हुआ बेपरवाह, मैं थका हुआ दिनभर का मैं जानू क्या ये दिल करता, दौलत से कभी नहीं दिल भरता तो रब दे रास्ता वाओ कैसे हंसी करूं जब पेट भरा हुआ, थोड़ा वेट बढ़ा हु आ, घर गेट बड़ा हुआ, मेरी भूख ना मिटे, मुझे भू त चढ़ा हुआ और तू काम का नहीं क्योंकि लेट खड़ा हुआ म्यूजिक जैसे कोई शीरा हो कानों में, जो चाहिए मुझे बिके ना दुकानों मे ं, ना ही ऊंचे किसी भी मकानों में, तू क्या ढूंढ रहा है दीवानों में? मेरे मुंह ना लगो, मैं दीवाना मेरे मुंह ना लगो मुझे हाल पे छोड़ दो, मुझे बस कुछ ना कहो चढ़ने से डरू, कुछ भी करने से डरू मौत नी आ साथ, तभी मरने से डरू मैं देख रहा अंजाम, आगे बढ़ने से डरू मेरे सीने में आग, तभी सड़ने से डरूं वाओ मैं कैसे भूलूं गलियां, कैसे भूलूं सड़कें, कैसे भूलूं शहर अपना? जहाँ रखा पैर अपना, जहाँ लगे मुझे हर एक गैर अपना मौला मेरी खैर रखना, मौला मेरी खैर रखना मैं कैसे भूलूं लोग अपने, मैं कैसे भूलूं शहर अपना? वाओ अब एक लेबल कॉल पे है, और एक लेबल चंद माह से बैठा इंतजार में एक लेबल मेरी टेबल पे पड़ी और कितने ही लोग खड़े हुए हैं कतार में एक लेबल जो कि मुझपे लगा, के मैं काम का बोल, के भी काम नहीं करता पर मैं आराम नहीं करता, रब दिया हुनर कैसे एहतराम नहीं करता जो कि नाराज बैठा मुझसे करता गिले, जो कि कहता है जेब बड़े मौके मिले जो कि जानता नहीं, मैं भी बोलता नहीं, कला थक गई जैसे बूढ़ी होके मिली तो तुझे भी तो ये पता है, कला की क्या इंतहा है? कला बड़ी बावफा है, जहाँ देखूं बस खुदा है मैं नाचिस कैसे करूं बातचीत, देखूं अपनी हार चीज, ढूंढूं कोई तावीज मुझे कुछ मिलता नहीं है, रब दे दवा, दिल खिलता नहीं है मैं कैसे भूलूं गलियां, कैसे भूलूं सड़कें, कैसे भूलूं शहर अपना? जहाँ रखा पैर अपना, जहाँ लगे मुझे हर एक गैर अपना मौला मेरी खैर रखना, मौला मेरी खैर रखना मैं कैसे भूलूं लोग अपने, मैं कैसे भूलूं शहर अपना? वाओ