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Sham (Explicit)
Amit Trivedi, Nikhil D'Souza & Neuman Pinto
Popularity · Low
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🇮🇳 Hindi · Original
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Lyrics
Original
Translation
Bilingual
शाम भी कोई जैसे है नदी लहर लहर जैसे बह रही है
कोई अनकही कोई अनसुनी बात धीमे धीमे कह रही है
कहीं ना कहीं जागी हुई है कोई आरज़ू
कहीं ना कहीं खोये हुए से है मैं और तू
(के बूम बूम बूम पारा पारा)
है खामोश दोनों
(के बूम बूम बूम पारा पारा)
है मदहोश दोनों
जो गुमसुम गुमसुम है फिजायें
जो कहती सुनती है यह निगाहें
गुमसुम गुमसुम है फिजायें है ना
सुहानी सुहानी है ये कहानी जो ख़ामोशी सुनाती है
जिसे तुने चाहा होगा वो तेरा मुझे वो ये बताती है
मैं मगन हूँ पर ना जानू कब आनेवाला है वो पल
जब हौले हौले धीरे धीरे खिलेगा दिल का ये कँवल
(के बूम बूम बूम पारा पारा)
है खामोश दोनों
(के बूम बूम बूम पारा पारा)
है मदहोश दोनों
जो गुमसुम गुमसुम है फिजायें
जो कहती सुनती है यह निगाहें
गुमसुम गुमसुम है फिजायें है ना
ये कैसा समय है कैसा समा है के शाम पिगल रही
ये सब कुछ हसीन है सब कुछ जवान है है ज़िन्दगी मचल रही
जगमगाती झिलमिलाती पलक पलक पे ख्वाब है
सुन ये हवाएं गुनगुनाये जो गीत लाजवाब है
(के बूम बूम बूम पारा पारा)
है खामोश दोनों
(के बूम बूम बूम पारा पारा)
है मदहोश दोनों
जो गुमसुम गुमसुम है फिजायें
जो कहती सुनती है यह निगाहें
गुमसुम गुमसुम है फिजायें है ना