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Shree Ganesh Chalisa

Shraddha Jain
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Lyrics

जय त्रिशम्भु सुत गौरी नन्दन विघ्न हरन नासन भव फन्दन जय गणनायक जन सुखदायक विश्व विनायक बुद्धि विधायक एक रदन गजवदन बिराजत वक्रतुण्ड शुचि शुण्ड सुसाजत तिलक त्रिपुण्ड भाल शशि सोहत छबि सखि सुर नर मुनि मन मोहत उरमणि माल सरोर हलोचन रत्न मुकुट सिर सोच विमोचन करकुट्ठार शुचि त्रिशूलम् मोदक भोग सुगन्धित फूलम् सुन्दर पीताम्बर तन साजित चरण पादुका मुनि मन राजित धनि शिव सुवन भुवन सुखदाता गौरी ललन षडानन भ्राता रिद्धि सिद्धि तम चंवर सुढारहिं मूषक वाहन सोहित द्वारहिं तव महिमा को वर्णै पारा जन्म चरित्र विचित्र तुम्हारा एक असुर शिव रूप बनावे गौरी हि छलन हेतु तहँ आवे यह कारण ते श्री शिव प्यारी निज तन मैल मूर्ति रचि डारी सो निज सुत करि गृह रखवारे द्वारपाल सम तेहि बैठारे जब हि स्वयं श्री शिव तहँ आये बिनु पहिचान जान नहि पाये पूछ्यो शिव हो किनके लाला बोलत भे तुम वचन रसाला मैं हूँ गौरी सुत सुनि लीजे आगे पग न भवन हित दीजे आवहि मातु बूचि तब आओ बालक ने जानि बात बढ़ाओ चल न चायो शिव वचन न मान्यो तब है क्रुद्ध युद्ध तुम उठान्यो तक्षण नहि कछु शम्भु विचार्यो गहि त्रिशूल भूल वश मार्यो शिरिश फूल सम सिर कटि गयऊ छट उड़ि लोपमय भयऊ गयो शम्भु जब भवन मंझारे जहँ बैठि गिरराज कुमारे पूछे शिव निज मन मुसकाये कहहु सति सुत कहते जाये खुलि गे भेद कथा सुनि सारी गिरि विकल गिरराज दुलारी कियो न भल स्वामी अब जाओ लाओ शीश जहाँ से पाओ चल्यो विष्णु संग शिव ज्ञानी मिलयो न सो हस्तीहि सिर आनी धड़ो पर स्थित कर दीन्यो प्राण वायु संचालित कीन्हो श्री गणेश नाम धरायो विद्या बुद्धि अमर वर पायो भय प्रभु प्रथम पूज्य सुखदायक विघ्न विनाशक बुद्धि विधायक प्रथम हि नाम लेत तब जोई जग कहे सकल काज सिद्ध होई सुमरहि तुमहि मिलहि सुख नाना बिनु तव कृपा न कहुँ कल्याणा तुमरहि शाप भयो जग अंकित भादवं चौथी चन्द्र अकलंकित जब हि परीक्षा शिव तुम्हि लीना प्रदक्षिणा पृथ्वी कहि दीन्हा षड़ मुख चल्यो मयूर उड़ाई बैठि रचे तुम सहज उपाई राम नाम महि पर लिखि अंका कीन प्रदक्षिणा तजि मन शंका श्री पितु मातु चरण धरि लीन्यो ता कह सात प्रदक्षिणा कीन्यो पृथ्वी परिक्रमा फल पायो असलखि सुर न सु मन वर शायो सुन्दर दास राम के चेरा दुर्वासा आश्रम धरि डेरा विरच्यो श्री गणेश चालीसा शिव पुराण वर्णित योगीशा नित्य गजानन जो गुण गावत गृह बसि सुमति परम सुख पावत जन धन धान्य सुवन सुखदायक देहि सकल शुभ श्री गणनायक