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Har Sham Sham-E-Gham
Talat Mahmood
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🇮🇳 Hindi · Original
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हर शाम शाम-ए-ग़म है, हर रात है अँधेरी
अपना नहीं है कोई, क्या ज़िन्दगी है मेरी
हर शाम शाम-ए-ग़म है
ग़म सहते-सहते ग़म की तस्वीर बन गया हूँ
तस्वीर बन गया हूँ
जा ऐ बहार-ए-दुनिया हालात ना पूछ मेरी
क्या ज़िन्दगी है मेरी
हर शाम शाम-ए-ग़म है
सामान-ए-ज़िन्दगी में कुछ भी नहीं बचा है
कुछ भी नहीं बचा है
एक दर्द रह गया है और एक याद तेरी
क्या ज़िन्दगी है मेरी
हर शाम शाम-ए-ग़म है, हर रात है अँधेरी
अपना नहीं है कोई, क्या ज़िन्दगी है मेरी
हर शाम शाम-ए-ग़म है
खुशियों का एक दिन भी आया ना ज़िन्दगी में
आया ना ज़िन्दगी में
पछता रहा हूँ मैं तो दुनिया में आके तेरी
क्या ज़िन्दगी है मेरी
हर शाम शाम-ए-ग़म है, हर रात है अँधेरी
अपना नहीं है कोई, क्या ज़िन्दगी है मेरी
हर शाम शाम-ए-ग़म है