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Hum Panchhi Ek Daal Ke, Pt. 1
Mohammed Rafi
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🇮🇳 Hindi · Original
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जिस घर के लोगों को सुबह झगड़ते देखा है
शाम हुई कि घर वो ही उजड़ते देखा है
अरे, बनती नहीं है बात झगड़े से कभी यारों
बनते-बनते बात को बिगड़ते देखा है
अरे, हम पंछी एक डाल के (एक डाल के)
हम पंछी एक डाल के, एक डाल के, होए
संग-संग डोलें, ये संग-संग डोलें
(संग-संग डोलें, ये संग-संग डोलें)
बोली अपनी-अपनी बोलें
बोली अपनी-अपनी बोलें (जी बोलें, जी बोलें)
हाँ, (संग-संग डोलें, ये संग-संग डोलें)
(हम पंछी एक डाल के, एक डाल के)
दिन के झगड़े दिन को भूले, हो
दिन के झगड़े दिन को भूले
रात को सपनों में हम झूलें
(रात को सपनों में हम झूलें)
धरती बिछौना, नीली चदरिया
मीठी नींदें सो लें (जी सो लें, जी सो लें)
हाँ, संग-संग डोलें, ये संग-संग डोलें
(संग-संग डोलें, ये संग-संग डोलें)
बोली अपनी-अपनी बोलें
बोली अपनी-अपनी बोलें (जी बोलें, जी बोलें)
आ-हा (संग-संग डोलें, ये संग-संग डोलें)
(हम पंछी एक डाल के, एक डाल के)