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KAAFIR - In Search Of 72 HOORAIN
Maan Panu
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🇮🇳 Hindi · Original
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गुमराह ही रही ख़ूनी सर-ज़मीं
कुछ पाया ही नहीं तो काफ़िर ही सही
अँधेरों में चले कठपुतली से बने
पर्दों में ज़िंदगी तो काफ़िर ही सही
लालची नज़रें हुस्न के भूखे
बहा के ये लहू ढूँढे जन्नतें
गाड़ दी क़ब्रों में इंसानियत जिसने
जब मंजिल ही नहीं, मुसाफ़िर ही सही
गुमराह ही रही ख़ूनी सर-ज़मीं
कुछ पाया ही नहीं तो काफ़िर ही सही
अँधेरों में चले कठपुतली से बने
पर्दों में ज़िंदगी तो काफ़िर ही सही
मज़हब या धरम तलाशे भरम
देते हैं ज़ख़्म कच्चे ये करम
तन से है जुदा सुलगता बोझ है
भटके भीड़ में देखे कौन है
टूटे सिलसिले हक़ीक़त से मिले
"हूरें हैं कहाँ?" पूछे ये गिले
चीखते बे-गुनाह साँसें छीन ली
ऐसी हिम्मतों से तो कायर ही सही
गुमराह ही रही ख़ूनी सर-ज़मीं
कुछ पाया ही नहीं तो काफ़िर ही सही
अँधेरों में चले कठपुतली से बने
पर्दों में ज़िंदगी तो काफ़िर ही सही