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Barsaat Ki Rat: Zindagi Bhar Nahi Bhoolegi
Mohammed Rafi
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🇮🇳 Hindi · Original
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ज़िंदगी-भर नहीं भूलेगी वो बरसात की रात
एक अनजान हसीना से मुलाक़ात की रात
ज़िंदगी-भर नहीं भूलेगी...
हाय, वो रेशमी ज़ुल्फ़ों से बरसता पानी
हाय, वो रेशमी ज़ुल्फ़ों से बरसता पानी
फूल से गालों पे रुकने को तरसता पानी
दिल में तूफ़ान उठाते हुए...
दिल में तूफ़ान उठाते हुए जज़्बात की रात
ज़िंदगी-भर नहीं भूलेगी...
डर के बिजली से अचानक वो लिपटना उसका
और फिर शर्म से बलखा के सिमटना उसका
कभी देखी ना सुनी ऐसी, हो
कभी देखी ना सुनी ऐसी तिलिस्मात की रात
ज़िंदगी-भर नहीं भूलेगी...
सुर्ख़ आँचल को दबा कर जो निचोड़ा उसने
सुर्ख़ आँचल को दबा कर जो निचोड़ा उसने
दिल पे जलता हुआ एक तीर सा छोड़ा उसने
आग पानी में लगाते हुए...
आग पानी में लगाते हुए हालात की रात
ज़िंदगी-भर नहीं भूलेगी...
मेरे नग़्मों में जो बसती है वो तस्वीर थी वो
नौजवानी के हसीं ख़्वाब की ताबीर थी वो
आसमानों से उतर आई, हो
आसमानों से उतर आई थी जो रात की रात
ज़िंदगी-भर नहीं भूलेगी वो बरसात की रात
ज़िंदगी-भर नहीं भूलेगी...