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Pata Nahi Kis Roop Mein Aakar Narayan Mil Jayega
Samriddh Gaur Chetna
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पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएगा
निर्मल मन के दर्पण में वह राम के दर्शन पाएगा
पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएगा
निर्मल मन के दर्पण में वह राम के दर्शन पाएगा
राम के दर्शन पाएगा
नर शरीर अनमोल रे प्राणी प्रभु कृपा से पाया है
झूठे जग प्रपंच में पड़कर प्रभु को क्यूँ बिसराया है?
नर शरीर अनमोल रे प्राणी प्रभु कृपा से पाया है
झूठे जग प्रपंच में पड़कर प्रभु को क्यूँ बिसराया है?
समय हाथ से निकल गया तो श्री धुन-धुन पछताएगा
निर्मल मन के दर्पण में वो राम के दर्शन पाएगा
पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएगा
निर्मल मन के दर्पण में वह राम के दर्शन पाएगा
राम के दर्शन पाएगा
हो, झूठ, कपट, निंदा को त्यागो, हर प्राणी से प्यार करो
घर पर आए अतिथि कोई तो यथाशक्ति सत्कार करो
हो, झूठ, कपट, निंदा को त्यागो, हर प्राणी से प्यार करो
घर पर आए अतिथि कोई तो यथाशक्ति सत्कार करो
पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएगा
निर्मल मन के दर्पण में वो राम के दर्शन पाएगा
पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएगा
निर्मल मन के दर्पण में वह राम के दर्शन पाएगा
राम के दर्शन पाएगा
साधन तेरा कच्चा है जब तक प्रभु में विश्वाश नहीं
मंज़िल पर पाना है क्या जब दीपक में प्रकाश नहीं?
साधन तेरा कच्चा है जब तक प्रभु में विश्वाश नहीं
मंज़िल पर पाना है क्या जब दीपक में प्रकाश नहीं?
निश्चय है तो भवसागर से बेड़ा पार हो जाएगा
निर्मल मन के दर्पण में वो राम के दर्शन पाएगा
पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएगा
निर्मल मन के दर्पण में वह राम के दर्शन पाएगा
राम के दर्शन पाएगा