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Listen up बिछड़ चुके हैं टूटी शीशे की तरह दोनों बिखर चुके हैं लेकर बैठी है वो आज़ हम संभल जाएंगे उनको बता दो हम बिगड़ चुके हैं चुप सी रहती है वो करती मुझसे बात नहीं गुस्से में देखे मुझे लगे वो नाराज़ नहीं आपको अंदाजा भी किस दर्द से मैं गुजर रहा खुद को कैसे बताऊं कि जिंदगी में आप नहीं आप डांटती हैं मुझे इसका मतलब कि आप बुरी हैं आपके बिना मेरी महफिलें अधूरी हैं क्या करा था मैंने जाना प्यार के सिवा चेहरा फेरा और जो गर्दन आपने मोड़ी है हम गली से जो निकले उसके करके वादा कि खाली कसम के नहीं जाएंगे दोबारा कदम रखते ही अटक जाएंगी सांसें मेरी, तो आज उस गली में जाने का है इरादा पहली बार तैमूर किसी के लिए रो गया है, तो आपसे मिलना मुझे लगता अब जरूरी हो गया है कॉले मत करें बार-बार मुझे कितनी बार बता चुकी हूं तैमूर सो गया है तुझे हाल-ए-दिल सुना के, हम चाह के भी न चाह सके दो कदम दूर हो के तुझे हम ना पा सके तू सुनती मेरे गाने, सब पहुंचे तेरे दिल तक पर तेरे दिल के मोहल्ले में हम ना आ सके उदासियां हम लेकर बैठे तुझसे दूर तू जन्नत है एक मेरी और तू उसमें इक ही हूर अब वो मिलेगी तो वादा करके उठूंगा, कि अगली बार भी हम मिलेंगे जरूर मैं किसी के लिए रोया नहीं, पर तेरे लिए रो गए हम पहले नींद ही नहीं आती थी, तू चली गई तो सो गए हम हम खड़े रहे मर्द की तरह, बदला दिल तूने घर की तरह बेवफाओं को फिर रोकते नहीं हम, जाने दिया आपने फर्श की तरह मोहब्बत तो बिकती है बाजारों में, और दिल दिया तूने कर्ज की तरह सपैरों तले रोन गए मुझे, और मैं बिछड़ा रहा फर्श की तरह याद रखें दूर हो के ठोकरें ही खाएंगी आप आप मेरे दिल में अदावत ले के आएंगी मेरी जिंदगी में रोक टोक नहीं थी, अब आप भी अपने घर से इजाजत ले के जाएंगी ए खुदा मेरे नसीब में क्यों दर्द लिखे, हर काम अब अधूरा हो रहा है बचपन से शायरी का शौक था मुझे, आज तेरी वजह से वो पूरा हो रहा है तेरा इंतजार मुद्दतों से, लगा चुके हैं दिल हम पत्थरों से की कोशिशें जला सके ना, बसी है खुशबू तेरी उन खतों में ले गई हैं तुझे दूर मुझसे ये हवाएं, कि स तरह से टूटे कि अब टूट के भी लिख ना पाएं तेरे दर से भटके तो हुए हैं लापता, हम तू बता अब किधर जाएं, किसको हाल-ए-दिल सुनाएं ऐसे रूठ गए हो जैसे जानते नहीं, ऐसे दूर हो गए हो जैसे पास थे नहीं क्यों चुरा के नजर गुजरते हो सामने से, तुम् हीं तो पहचानते और अब तुम्हीं पहचानते नहीं तेरे बाद अपनी जात पर हंसा हूं मैं, ते रे बाद तेरी याद से भी तो लड़ा हूं मैं तूने कह दिया था देख लो तुम आये ना, तो रो गया मैं देख के कि कहां हो तू और क्या हूं मैं तेरे बाद ख्वाब ख्वाब जैसे लगते हैं, तेरे बाद ख्वाब देखना ही छोड़ दिए तेरे बाद खुद को देखा ही नहीं गौर से, तेरे बाद घर के आये नहीं तोड़ दिए छोड़ दिए रास्ते अब जिनसे तुम गुजरते हो तुम भी रहे वो नहीं मोहब्बतों से डरते हो कैसे मान लूं तुम्हें पसंद खामोशियां, मे री तरह क्या अब तुम भी चेहरे पढ़ते हो ढल गया हूं तुझमें किसी शाम की तरह तू मुझसे दूर बैठा है अब चाँद की तरह परवाह नहीं तेरी अब अंजाम की तरह, मैं तन्हा रह गया हूं अपने नाम की तरह और तेरे बाद कोई आएगा नहीं जिंदगी में, अफसोस ये कि तू भी कभी आया नहीं तुझे भूलना ही बेहतर था जल्द से, क्या सितम है कि मैं तुझको भूल पाया नहीं लाहासिल है तू सोच के मजबूर हो रहा हूँ बस यही लिखा है कि तुझसे दूर हो रहा हूँ अब जो लिख दिया वो ही पढ़ देता हूँ महफ़ि लों में, तुझे खोकर तो मशहूर हो रहा हूँ प्यार, दौलत, इज़्ज़त वक्त बेझिझक लगा दि या, मेरा वजूद बना किस्सा एक मज़ाख़िया अब बस बहुत हुआ पूरी कर दो ये ग़ज़ल अब बस रह गया है मोहब्बत का क़ाफ़िया सहता गया सब कुछ भी कहा नहीं किसी को, क्या मै ं बोझ बन चुका हूँ खुद ही सेहरा हूँ खुद ही को तेरी दूरियों पर लिख लिख कर सफ़े भर दिए हैं तेरी खुशबू, कैसे लिखूँ तुम करीब आओ कभी तो सभी को लगा मुस्कुराना इक इशारा बन गया मैं लिखता गया काफी ये खुद का सहारा बन गया मैं बात करता तारों से मुखातिब था इन सारों से, मु खातिब मुझसे तारे कहते इक सितारा बन गया मैं दर्द-ए-दिल को झेल के ये दिल बना जेल, किस्मत अकेला तू कैदी है रंगभरी दुनिया में नादान दिल ने बस यादें ही समेटी हैं जो न रुकता था कलम वो भी थक चुका बस, अब और कितना लि खूं मैं तेरी यादों में मुझसे ये सियाही भी कहती है बेबसी में बेवजह ही बेवफा से बावफा हुए हैं, तेरी ना राज़गी अलग हम तो जान अब खुद ही से यूं खफा हुए हैं तेरी खुशी तभी छोड़ा तेरा हाथ तेरे कहने पर, बर्बाद पर हम आज भी तेरे लिए नफा हुए खफा हुए जबाने से दफा हुए, कमाने जो तबाह हुए मेखानों में जवां हुए हम फाकों में हम ख्वाबों में भी बाहों में वो पूछे क्यों तबाह हूं मैं