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Iss Tarah
Chaar Diwaari, Sonu Nigam - Iss Tarah
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अंबर से सागर मिले
ले चल तू वहाँ पे मुझे
इस तरह आ
फिर हम मिल ना पाएँ
आजा, शाम ढलती जाए
जानाँ, ढूँढे तुझे दीवाना
इस तरह आ
फिर हम मिल ना पाएँ
आजा, शाम ढलती जाए
जानाँ, ढूँढे तुझे दीवाना
आधा दिल, आधी रूह
मैं आधा हूँ, आधी तू
ऐसे हों हम आधे क्यूँ?
क्या कुछ ऐसा करें
हम समय के परे मिल जाएँ
हम पिघल जाएँ
आधा दिन, आधी रात
आकाश से तोड़ लूँ
घोल दूँ इक प्याले में
प्याला मैं भी पियूँ
प्याला तू भी पिए, मिल जाए
वक़्त पिघल जाए
ऐसी जहाँ हाला मिले
ले चल तू वहाँ पे मुझे
आ, इस तरह आ
फिर हम मिल ना पाएँ
आजा, शाम ढलती जाए
जानाँ, ढूँढे तुझे दीवाना
इस तरह आ
फिर हम मिल ना पाएँ
आजा, शाम ढलती जाए
जानाँ, ढूँढे तुझे दीवाना
क्या मैंने कोई माँगी दुआ?
सज्दा क्या कोई किया?
किसी ऋषि की क्या लगी कृपा
जो मैंने तुझे देखा?
पैरों में पायल झनके
नाचूँ मैं मीरा बनके
लज्जाती राधा सी मैं
'गर मेरे मोहन हँस दें
मोहन को
प्यार मुझसे अगर हो
बाँहों में अभी भर लो
कल क्या हो, किस ने जाना?
हो, इस तरह आ
फिर हम मिल ना पाएँ
आजा, शाम ढलती जाए
जानाँ, ढूँढे तुझे दीवाना
घर से आवारा मैं
पाँव में छाले भर के चलता रहा
आ, होंठों पे तेरा नाम सील कर
मैं बातें ख़ुद से करता रहा, करता रहा
भँवरों ने मुझसे कहा, "पागल पतंगा हुआ
लगता है, उनको नहीं तू दिख रहा"
अब मैं ये पूछता हूँ तुझसे कि ऐसा क्या था मुझमें
कि तुझको मैं ना दिखा?