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Manzil Ki Dhun Mein

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मंज़िल की धुन मे झूमते गाते चले चलो बिछड़े हुए दिलों को मिलाते चलो चलो हाँ मिलाते चलो चलो दो दिन की ज़िंदगी में कोई क्यूँ उठाये ग़म कोई क्यूँ उठाये ग़म नग़्में ख़ुशी के सब को सुनाते चले चलो बिछड़े... इन्सानियत तो प्यार मोहब्बत का नाम है मोहब्बत का नाम है इन्सानियत की शान बढ़ाते चलो चलो बिछड़े हुए... आज़ाद ज़िंदगी है तो बर्बाद क्यूँ रहे बर्बाद क्यूँ रहे बर्बादियों से दिल को बचाते चले चलो बिछड़े हुए... मंज़िल की धुन मे झूमते गाते चले चलो बिछड़े हुए दिलों को मिलाते चलो चलो