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Aakhir Kyun
Porshia (Kurdish), Bishakh Jyoti, Mahalakshmi Iyer, Anant
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आवाज़ों पर थीं ज़ंजीरें
ख़्वाबों की काली ताबीरें
आवाज़ों पर थीं ज़ंजीरें
ख़्वाबों की काली ताबीरें
सायों पर भी डर का पहरा
सायों पर भी डर का पहरा
दर्द ख़लाओं से भी गहरा
चीखों की बढ़ती आबादी
बहरी हो गई सारी वादी
चीखों की बढ़ती आबादी
बहरी हो गई सारी वादी
रोशन-रोशन सारी रूहें
रोशन-रोशन सारी रूहें
अंधेरों की हो गई आदी
ज़ख़्मों से ही यारी थी जब
मौत ही सबसे प्यारी थी जब
ज़ख़्मों से ही यारी थी जब
मौत ही सबसे प्यारी थी जब
तब जीने की हसरत जागी
मरने की तैयारी थी जब
उम्मीदों का दरिया गहरा
अहसासों में ऐसे ठहरा
उम्मीदों का दरिया गहरा
अहसासों में ऐसे ठहरा
हरियाली की आहट सुनके
हरियाली की आहट सुनके
जैसे रो पड़ता है सहरा
अंधेरों के धागे तोड़े
अंधेरों के धागे तोड़े
मन पे लिपटे साये छोड़े
मन पे लिपटे साये छोड़े
रोशन हो गईं रूहें फिर से
रोशन हो गईं रूहें फिर से
आतिश में तन सारे छोड़े