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Khudgarz
Nishad Patki
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🇮🇳 Hindi · Original
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जल रहा है ये जहाँ क्यूँ?
बंजर बनी है ये ज़मीं क्यूँ?
उठ रहा है फ़िर से धुआँ क्यूँ?
धुँधला हुआ है फ़िर आसमाँ क्यूँ?
कैसी अपनी उठान है
ख़ुद में ही गुम हम सभी
कैसी ये दिल की प्यास है
बुझने वाली नहीं कभी
तुझे क्या, तू है ज़िंदा
होना हो पेड़ या परिंदा
बे-रहमी सह ले दुनिया की
ख़ुद-ग़र्ज़ फ़िर भी रहेगा
कल को कभी किसने है देखा?
पल में सभी हो जाएगा तबाह
वक़्त है सही रुक जा तू अभी
ग़लती से ना हो फ़िर ख़ुदा की मर्ज़ी
कल की तक़दीर हम लिखे
कलम है आज हाथ में
भर लो ज़हन में बात ये
फ़िर ना कोई कह सके
तुझे क्या, तू है ज़िंदा
होना हो पेड़ या परिंदा
बे-रहमी सह ले दुनिया की
ख़ुद-ग़र्ज़ फ़िर भी रहेगा
तुझे क्या, तू है ज़िंदा
होना हो पेड़ या परिंदा
बे-रहमी सह ले दुनिया की
ख़ुद-ग़र्ज़ फ़िर भी रहेगा
तुझे क्या, तू है ज़िंदा
होना हो पेड़ या परिंदा
बे-रहमी सह ले दुनिया की
ख़ुद-ग़र्ज़ फ़िर भी रहेगा
ख़ुद-ग़र्ज़ फ़िर भी रहेगा
ख़ुद-ग़र्ज़ फ़िर भी रहेगा
ख़ुद-ग़र्ज़ फ़िर भी रहेगा