Kaun Ho
Siddhant Bansal
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क्यों इन परदों में तुम खुद को सजाए बैठे हो
असल में जो ये चेहरा है क्यों सबसे छुपाए बैठे हो
सब पता है तुमको फिर भी जी रहे क्यों अनजान बन कर
खुद को खोते जा रहे हो रहते हो क्यों तुम आम बन कर
बातें क्यों करते तुम सँभल-सँभल के
जैसे हर्फ़ों के काँटों पर हो चलते
ना डरो किसी से तुम जानते हो क्या है तुमको करना
खुद से खुद की है लड़ाई, जीते जीते क्यों है तुमको मरना
खामोश क्यों खड़े तुम वहाँ
भीड़ में यूँ तुम तन्हा
कौन हो तुम, तुम्हें ही पता
कर दो खुद को रिहा