Skip to content
Lyric
Dive
Public playlists
My playlists
Search
Sign in
Ghar Bana Liya
Apoorv Srivastava
Popularity · Low
+
🇮🇳 Hindi · Original
0
0
YouTube
Searching YouTube...
Lyrics
Original
Translation
Bilingual
बंधे इस काम-काज की ज़िंदगी ने जीना सिखा दिया
बंजारे दिल ने ठहर के इस मकान को घर बना लिया
बंधे इस काम-काज की ज़िंदगी ने जीना सिखा दिया
बंजारे दिल ने ठहर के इस मकान को घर बना लिया
रातों का बिस्तर, सुबह की चाय
उलझी राहों का, सुकुन है क्या ये?
अंजां शहर ने, आँसू वो देखे
अपने घर की याद, में जो बहे थे
कोई पूछे कभी कि खुश हो, तो अभी बस मुस्कुरा दिये
मगर ये हाल दिल की ना सुन रहे, इसे चुप करा लिये
बंधे इस काम-काज की ज़िंदगी ने जीना सिखा दिया
बंजारे दिल ने ठहर के इस मकान को घर बना लिया
ज़िम्मेदारियों ने ली क्यूँ यादें खरीद!
नादां तस्वीरों में भी मिल ना रही
ज़िम्मेदारियों ने ली क्यूँ यादें खरीद!
नादां तस्वीरों में भी मिल ना रही
धूँधली सी राहों पर ये भटका सा मन
कोहरा ये कैसा ना होता खत्म!
अपना वो कमरा, बचपन की यारी
पीछे छोड़ आये, ठुकरा के सारे
ज़ाहिर है ये कि, ये दिल है बेचैन
खुद से ही फिर क्यूँ, छुपा रहे हैं!
जो ठुकरा दी थी घर की वो रोटियाँ, बड़े नासमझ थे हम
वो सालों पहले बह चुके आँसुओं से दिल आज भी है नम
बंधे इस काम-काज की ज़िंदगी ने जीना सिखा दिया
बंजारे दिल ने ठहर के इस मकान को घर बना लिया
झूठ है तेरा हँसना यारा
झूठ है तेरा हँसना
झूठ है तेरा हँसना यारा
झूठ है तेरा हँसना
झूठ है तेरा हँसना यारा
झूठ है तेरा हँसना
झूठ है तेरा हँसना यारा...
ये बेगर्ज़ सी ख़ुदगर्ज़ियाँ
बंधे इस काम-काज की ज़िंदगी ने जीना सिखा दिया
बंजारे दिल ने ठहर के इस मकान को घर बना लिया
बंधे इस काम-काज की ज़िंदगी ने जीना सिखा दिया
बंजारे दिल ने ठहर के इस मकान को घर बना लिया