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Ghar (Reprise)
Amit Trivedi
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🇮🇳 Hindi · Original
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Lyrics
Original
Translation
Bilingual
छटपटाती जलपरी मैं, तोड़े रिश्ते सब से
नया ठिकाना इसका अब तो ढूँढो
हुई मगन वो, बिना सजन वो, ਕੁੜੀ अकेली सरगम
सारे वो राग गाए आज़ाद, तिक-दुम
लहज़ा सीधा-साधा, सबको लगे खारा
जीतने जो आया जग को, वो भी इससे हारा
फुलझड़ी-सी लड़की, लगे ये सबको सनकी
दुनिया बोले "झल्ली", "कल्ली", ये चली मचलती
आसमाँ, दरीचा और हवा-बागीचा
छत पे है तारों का समाँ
मैं जो खिल गई, हर मुश्किल गई
करना झाड़ू पोंछा, breakfast में समोसा
और काली coffee ही सही
घर दो है यहीं, जो ढूँढा ना मिला कहीं
हर दुआ पूरी है, ना और कुछ मुझे ज़रूरी है
घोंसला मिला मुझे, खोई हँसी फ़िर से मिली है
टेढ़ा-मेढ़ा, छोटा-सा ये आशियाँ
मैंने तिनका-तिनका है बुना
आसमाँ, दरीचा और हवा-बागीचा
छत पे है तारों का समाँ
मैं जो खिल गई (खिल गई)
हर मुश्किल गई (खिल गई)
मैं जो खिल गई (खिल गई)
तो ख़ुद से ख़ुद को अब हूँ मैं मिल गई