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Karma Song
B. Ajaneesh Loknath, JUNO and Venkatesh D. C.
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🇮🇳 Hindi · Original
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कर्म की कोख ही जन्म का द्वार है
यही संसार का सार है
सुख की ना ये धरा, ये मझधार है
यही संसार का सार है
करनी की गागर का खेल कैसा
कि पाप धुले, पश्चाताप ना धुले
(हे, हा, हे, हो, देना)
(हरे, हरो, मेरा लीनो, रे)
ओ, देह की चादर साफ करे
और कालिख तू मन की ढकता है रे
नैनों को मूँद के पाप करे
पर खुले नैन भगवन रखता है रे
कभी कोई मृग लुभाए, कभी संदल
करता फिरे तू परछाइयों से दंगल
हवन में चाहे तू लाख जलाए
दुखियारों के मन का वो श्राप ना जले
(हे, हा, हे, हो, देना)
(हरे, हरो, मेरा लीनो, रे)
ओ, जिस पल वो तेरा जन्म लिखे
उस पल ही वो अंतिम घड़ियाँ लिखे
खेल ये जो कोई भाँप गया
उसको ही वो उजला ज़रिया दिखे
जीवन में ये तेरा दुख भरा कोई बंधन
मरण भला है, तन जले जैसे चंदन
दुख के सागर का खेल ऐसा
कि आँसू टले, पर विलाप न टले
(हे, हा, हे, हो, देना)
(हरे, हरो, मेरा लीनो, रे)