Dekha Ek Khwab
Lata Mangeshkar/ Kishore Kumar
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ये तो सभी जानते हैं कि Amit जी के पिता
श्री Harivansh Rai Bachchan महान कवि थे
इस लिए Amit जी को भी शेर-ओ-शायरी बड़ा ज़्यादा शौक़ है
वो एक शेर सुनाते थे, आप भी सुनिए
मिलने का वादा मुँह से तो उनके निकल गया
आय-हाय, मिलने का वादा मुँह से तो उनके निकल गया
पूछी जगह जो मैंने, कहा हँस के, "ख़्वाब में"
देखा एक ख़्वाब तो ये सिलसिले हुए
दूर तक निगाह में हैं गुल खिले हुए
देखा एक ख़्वाब तो ये सिलसिले हुए
दूर तक निगाह में हैं गुल खिले हुए
ये गिला है आपकी निगाहों से
फूल भी हों दरमियाँ तो फ़ासले हुए
देखा एक ख़्वाब तो ये सिलसिले हुए
दूर तक निगाह में हैं गुल खिले हुए
मेरी साँसों में बसी ख़ुशबू तेरी
ये तेरे प्यार की है जादूगरी
तेरी आवाज़ है हवाओं में
प्यार का रंग है फ़िज़ाओं में
धड़कनों में तेरे गीत हैं मिले हुए
क्या कहूँ कि शर्म से हैं लब सिले हुए
देखा एक ख़्वाब तो ये सिलसिले हुए
फूल भी हों दरमियाँ तो फ़ासले हुए
मेरा दिल है तेरी पनाहों में
आ, छुपा लूँ तुझे मैं बाँहों में
तेरी तस्वीर है निगाहों में
दूर तक रोशनी है राहों में
कल अगर ना रोशनी के क़ाफ़िले हुए
प्यार के हज़ार दीप हैं जले हुए
देखा एक ख़्वाब तो ये सिलसिले हुए
दूर तक निगाह में हैं गुल खिले हुए
ये गिला है आपकी निगाहों से
फूल भी हों दरमियाँ तो फ़ासले हुए
देखा एक ख़्वाब तो ये सिलसिले हुए
दूर तक निगाह में हैं गुल खिले हुए