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Naadaani
Gini, Bharath
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🇮🇳 Hindi · Original
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आख़िरी लम्हे
ज़ुबाँ पर थे ठहरे
छुपा रख लूँ इन्हे
कहीं गुल में गुम ना जाए
आएँ शरद में कहीं भटके जैसे पत्ते
यादों में भी चुभते हैं ये हट के
छोड़ इन्हें आओ, अब ना सताओ इन्हें
बताओ बस ये
तुम क्यूँ गए? (गए, गए)
बताया नहीं (नहीं, नहीं)
रोका समय (समय, समय)
दिखोगे कहीं
थी ये नादानी
नादानी
नादानी
नादानी
आख़िरी पन्ने
लिखे जो थे मन में
थे वो कड़वे
हक़ीक़त ना हो जाएँ
शरद में कहीं भटके जैसे पत्ते
यादों में भी चुभते हैं ये हट के
छोड़ इन्हें आओ, अब ना सताओ इन्हें
बताओ बस ये
तुम क्यूँ गए? (गए, गए)
बताया नहीं (नहीं, नहीं)
रोका समय (समय, समय)
दिखोगे कहीं
नादानी
नादानी
नादानी
नादानी
(नादानी) अब कुछ ना रहा, मैं बंजर ज़मीं
(नादानी) परवाह है सूखी आँसू से रची
(नादानी) देखा-अनदेखा कर यूँ गुम गई
(नादानी) पर घर ना मिले अगर मैं हूँ यहीं
अब कुछ ना रहा, मैं बंजर ज़मीं
परवाह है सूखी आँसू से रची
देखा-अनदेखा कर यूँ गुम गई
पर घर ना मिले अगर मैं हूँ यहीं