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Khaak
Ramil Ganjoo
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🇮🇳 Hindi · Original
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था ख़ाक ख़्वाबों का, आशियाँ अब सँवर रहा
जो धूल थी निगाहों में जमी हुई, अब पिघल रही
और हम बदल रहे, चल पड़े
वहाँ जहाँ हर एक सवेरा नया
कोसता हूँ मैं अभी उस कल को
सताता है जो अब भी रातों को
पर अब ढल रहा वो चाँद
उठेगा अब सूरज नया जो दफ़्न था
गाएगा दिलकश समाँ जो चुप सा था
अब कल का किसे है पता
क्या पता!
था ख़ाक ख़्वाबों का, आशियाँ अब सँवर रहा
जो धूल थी निगाहों में जमी हुई, अब पिघल रही
और हम बदल रहे, चल पड़े
वहाँ जहाँ हर एक सवेरा नया