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Saqiya Hosh Kahan Tha
Chitra Singh
,
Jagjit Singh
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🇮🇳 Hindi · Original
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आँख को जाम समझ बैठा था अनजाने में
आँख को जाम समझ बैठा था अनजाने में
साक़िया, होश कहाँ था तेरे दीवाने में
जाने किस बात की उनको है शिकायत मुझसे
जाने किस बात की उनको है शिकायत मुझसे
नाम तक जिनका नहीं है मेरे अफ़साने में
साक़िया, होश कहाँ था तेरे दीवाने में
दिल के टुकड़ों से तेरी याद की ख़ुशबू ना गई
दिल के टुकड़ों से तेरी याद की ख़ुशबू ना गई
बू-ए-मय बाक़ी है टूटे हुए पैमाने में
साक़िया, होश कहाँ था तेरे दीवाने में
दिल-ए-बर्बाद में उम्मीद का आलम क्या है?
दिल-ए-बर्बाद में उम्मीद का आलम क्या है?
टिमटिमाती हुई इक शम्मा है वीराने में
साक़िया, होश कहाँ था तेरे दीवाने में