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Meri Bhavna
Arohi Anil Agarkar
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🇮🇳 Hindi · Original
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जिसने राग, द्वेष, कामादिक जीते, सब जग जान लिया
सब जीवों को मोक्षमार्ग का निस्पृह हो उपदेश दिया
बुद्ध, वीर, जिन, हरि हर, ब्रह्मा, या उसको स्वाधीन कहो
भक्ति-भाव से प्रेरित हो यह चित्त उसी में लीन रहो
विषयों की आशा नहीं जिनके, सौम्य भाव धन रखते हैं
निज परके हित-साधन में जो, निश दिन तत्पर रहते हैं
स्वार्थ त्याग की कठिन तपस्या, बिना खेद जो करते हैं
ऐसे ज्ञानी साधू जगत के, दुःख समूह को हरते हैं
रहे सदा सत्संग उन्ही का, ध्यान उन्ही का नित्य रहे हैं
उन्ही जैसी चर्या में यह, चित्त सदा अनुरक्त रहे हैं
नहीं सताऊँ किसी जीव को, झूठ कभी नहीं कहा करूँ
परधन वनिता पर ना लुभाऊ, संतोशामृत पिया करूँ
अहंकार का भाव ना रखूँ, नहीं किसी पर क्रोध करूँ
देख दूसरों की बढती को, कभी ना इर्ष्या भाव धरूँ
रहे भावना ऐसी मेरी, सरल सत्य व्यवहार करूँ
बने जहाँ तक इस जीवन में, औरों का उपकार करूँ
मैत्री भाव जगत में मेरा, सब जीवों से नित्य रहे
दींन दुखी जीवों पर मेरे, उर से करुणा स्रोत बहे
दुर्जन क्रूर कुमार्ग रतो पर, क्षोभ नहीं मुझको आवे
साम्य भाव रखु में उन पर, ऐसी परिणति हो जावे
गुणी जनों को देख ह्रदय में, मेरे प्रेम उमड़ आवे
बने जहाँ तक उनकी सेवा, करके यह मन सुख पावे
होऊँ नहीं कृतघ्न कभी मैं, द्रोह ना मेरे उर आवे
गुण ग्रहण का भाव रहे नित, दृष्टी ना दोषों पर जावे
कोई बुरा कहो या अच्छा, लक्ष्मी आवे या जावे
लाखों वर्षों तक जियूँ या मृत्यु आज ही आ जावे
अथवा कोई कैसा ही भय या लालच देने आवे
तो भी न्याय मार्ग से मेरे, कभी ना पग डिगने पावे
होकर सुख में मग्न ना फूले, दुःख में कभी ना घबरावे
पर्वत, नदी, श्मशान भयानक, अटवी से नहीं भय खावे
रहे अडोल, अकंप निरंतर, यह मन द्रिन्तर बन जावे
इस्ट वियोग अनिस्ट योग में सहन-शीलता दिखलावे
सुखी रहे सब जीव जगत के कोई कभी ना घबरावे
बैर, पाप, अभिमान छोड़ जग, नित्य नए मंगल गावे
घर-घर चर्चा रहे धर्म की दुष्कृत दुष्कर हो जावे
ज्ञान चरित उन्नत कर अपना, मनुज जन्म फल सब पावे
इति भीती व्यापे नहीं जग में, वृष्टी समय पर हुआ करे
धर्मनिष्ठ होकर राजा भी न्याय प्रजा का किया करे
रोग मरी दुर्भिक्ष ना फैले, प्रजा शांति से जिया करे
परम अहिंसा धर्म जगत में, फ़ैल सर्वहित किया करे
फैले प्रेम परस्पर जग में, मोह दूर ही रहा करे
अप्रिय, कटुक, कठोर शब्द नहीं, कोई मुख से कहा करे
बनकर सब युगवीर ह्रदय से, देशोंनती रत रहा करे
वस्तु, स्वरुप, विचार, खुशी से, सब दुख संकट सहा करे
वस्तु, स्वरुप, विचार, खुशी से, सब दुख संकट सहा करे
वस्तु, स्वरुप, विचार, खुशी से, सब दुख संकट सहा करे